कमानिया रोग/सींग कैंसर

सींग कैंसर सींग के निचले हिस्से में एक गठान के रूप में उत्पन्न होता हैै। यह रोग मुख्यतः देशी नस्लों की गाय/बैलों में पाया जाता है क्योंकि देशी नस्लों की गायों में ही सींग पाए जाते हैं अथवा विदेशी नस्लों में सींग नहीं होते इसलिए यह रोग विदेशी गायध्बैलों में नहीं होताद्य सींग कैंसर सामान्यतः बड़े सींगों वाली नस्लें जेसेकि गिर, कांकरेज, मालवी प्रजाति में अधिक देखने को मिलता है।

मुख्य कारण   ः सींगो को रंगना अथवा अनुवांशिक कारण

रोग लक्षण     ः

1.      धीरे-धीरे सींग का हिलना एवं एक तरफ झुक जाना

2.      सींग के निचले हिस्से में सुजन अथवा सुराग होने पर मवाद और खून का रिसना

3.      जानवर का सिर को बार-बार हिलाना अथवा दर्द की वजह से एक ही तरफ झुकाए रखना

4. मक्खियों के बैठने से घाव में कीडे पड़ना

5. कभी कभी नाक से खून का आना

6. सींग का स्वतः टूट कर गिर जाना

रोग जांच: उपरोक्त लक्षणों द्वारा अथवा पशुचिकित्सक जाँच द्वारा

रोग उपचार एवं परामर्श: इस रोग का मुख्य उपचार पशुचिकित्सक द्वारा शल्य चिकित्सा से  ही संभव है, शल्यक्रिया के माध्यम से खराब कैंसर युक्त सींग को पूर्ण रूप से नीकाल दिया जाता हैैै। शल्यचिकित्सा के उपरांत कुछ दिनों तक सही तरह से घाव का रखरखाव और उपचार करने पर इस समस्या से निजात मिल जाता है।

रोग बचाव:  किसान भाईयों द्वारा जानवरों के सींगों को नहीं रंगना, एवं उचित रूप से देखभाल करने पर इस रोग से बचा जा सकता है द्य इस तरह की कोई भी समस्या होने पर तुरंत पशुचिकित्सक से परमर्श करना चाहिए जिससे समय पर सही उपचार हो सके द्य कुछ संगठित पशु-फार्मो में शुरूआती दिनों में ही बछड़ो के सींगों को बढ़ने से पहले ही रासायनिक विधि द्वारा जला दिया जाता है जिससे आने वाले समय में इस रोग की आशंका भी कम रहती है अथवा पशु-प्रबन्धन भी आसान होता हैै।

डॉ. आस्था चैरसिया, डॉ. बी.पी शुक्ला, डॉ. रेशमा जैन, डॉ. अतुल सिंह परिहार

पशु शल्यचिकित्सा एवं क्षःरश्मि विज्ञान विभाग

पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय, महू

नानाजी देशमुख पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय, जबलपुर (म.प्र.)