गौ नस्ल केनकथा


समानार्थी- केनवारीया
उत्पत्ति – बुंदेलखंड में केन नदी के किनारों पर, और मध्यप्रदेष के पन्ना, चरखाड़ी, बीजापुर और अजेगढ़। सड़क पर हल्के मसौदे और खेती के लिए के लिए लोकप्रिय। सस्ते आहार पोषण पर पालन किया जा सकता है । जानवरों को व्यापक प्रबंधन प्रणाली में रखा जा सकता है।
विशेषताएं/विशिष्ट लक्षण –
शरीर – छोटा, गहरा गंठिला, मजबूत और काफी शक्तिशाली।
शरीर का रंग – पेट पर भूरा एवं शरीर के बाकी हिस्सों पर गहरे भूरे रंग का ।
पीठ – सीधे लेकिन पुट्ठे गिरे हुए।
सिर – छोटा और चैड़ा।
माथा – उभरा हुआ।
सींग – सिर के किनारे निकलते हुये ऊपर से आगे की दिशा में तेज नुकीले में समाप्त।
कान – नुकीले और सीधे ।
पैर – छोटे लेकिन शक्तिशाली और मजबूत।
कूबड़ – अच्छी तरह से विकसित।
म्यान – लटकन वाली और अंतिम छोर पर काला धब्बा।
गलकम्बल – मामूली भारी।
पूॅंछ – मध्यम लंबाई । घुटनों के नीचे तक पहुंचना काले रंग का बालों का गुच्छा।