पशु पालन, डेयरी तथा मत्स्यपालन विभाग द्वारा एक केन्द्र प्रायोजित चारा विकास योजना
चलाई जा रही है, जिसका उद्देश्य चारा विकास हेतु राज्यों के प्रयासों में सहयोग देना है। यह
योजना 2005–06 से निम्नलिखित चार घटकों के साथ चलाई जा रही है:

  •      चारा प्रखंड निर्माण इकाइयों की स्थापना
  •      संरक्षित तृणभूमियों सहित तृणभूमि क्षेत्र
  •      चारा फसलों के बीज का उत्पादन तथा वितरण
  •      जैव प्रौद्योगिकी शोध परियोजना


केन्द्र प्रायोजित इस चारा विकास योजना का 2010 से उपलब्ध चारा के दक्ष प्रयोग को
सुनिश्चित करने के लिए उन्नयन किया गया है। इस मद में 141.40 करोड़ रुपये की
विनियोग राशि के साथ इस योजना में निम्नलिखित नए घटक/तकनीक मध्यस्थता शामिल
हैं:

  •          चारा परीक्षण प्रयोगशालाओं का सशक्तीकरण
  •          कुट्टी काटने वाली मशीन से लोगों को परिचित कराना
  •          साइलो-संरक्षण इकाइयों की स्थापना
  •         एजोला की खेती और उत्पादन इकाइयों का प्रदर्शन
  •         बाय-पास प्रोटीन उत्पादन इकाइयों की स्थापना
  •        क्षेत्र विशेष खनिज मिश्रण (ASMM) इकाइयों/चारा गोली निर्माण इकाइयों/चारा उत्पादन इकाइयों की स्थापना

चल रहे घटक, चारा प्रखंड निर्माण ईकाइयों की स्थापना के अंतर्गत भागीदारी बढ़ाने के लिए
अनुदान की राशि 50% बढ़ा दी गई है तथा संरक्षित तृणभूमियों सहित तृणभूमि विकास के
अंतर्गत सहायता के लिए भूमि अधिग्रहण हेतु भूमि का रकवा 5-10 uw. कर दिया गया है।


घटकों के बारे में विवरण, वित्त पोषण का रूप, तथा इकाई लागत