जानवरों में घाव की देखभाल एवं प्रबंधन

त्वचा, बलगम झिल्ली या ऊतक की सतह निरंतरता में टूट को घाव के रूप में परिभाषित किया गया है जोकि शारीरिक, रासायनिक या जैविक कारणों से हो सकता है। पालतू, साथी और उत्पादक पशुओं में घाव ज्यादातर समय एक कष्टप्रद बीमारी होती है। इसी तरह, पशुपालकों लिए भी घाव प्रवंधन दुविधापूर्ण होता है। इसके अलावा, अचानक कटने या किसी जानवर द्वारा काटे जाने पर घाव से खून का बहना पशु मालिक के लिए घबराहट और निराशा का कारण बनता है, यह घाव पशुओं के चाटने, काटने अथवा खरोंच से और संक्रमित, जटिल हो जाते हैं। मक्खी और मैगट के घाव पर बैठने से इसका इलाज और चुनोतीपूर्ण हो जाता है। इसलीये अगर घाव के इलाज में कुछ दिन की देरी भी पशु के लिए घातक हो सकती है। वर्तमान लेख पशु मालिकों द्वारा घाव की प्राथमिक चिकित्सा, घाव के संभावित कारणों, रोकथाम, एवं प्रबंधन से अवगत कराने के उद्देश्य से लिखा गया है।


जानवरों में चोटें और घाव के संभावित कारण।

घरेलू पशुओं में घाव के सामान्य कारण मुख्यतः जानवरों का आपस में झगड़ना, सींग मारना, कांटेदार तार से कटने (घोड़ों ध्मवेशियों में), आंतरिक सतहों पर घर्षण और त्वचा की रगड़ के कारण, गलत तरीके से दूध दोहते समय थनों में चोट, आवारा कुत्तों द्वारा गाय, भेंसो, बकरियों और घोड़ों को काटना अथवा अन्य कई कारण होते हैं। साथ ही, सड़कों पर तेज चलते वाहनों द्वारा दुर्घटना एवं चोट एक मुख्य कारण है।


जानवरों में घाव प्रबंधन में मुख्य भ्रांतियाँ

कुछ पशुपालकों गलतफहमी है कि घाव पर गोबर, मिट्टी या राख लगाने से घाव भर जाता है जबकि गोबर मिट्टी में लाखों जीवाणु होते है जो घाव को और खराब करते हैं। कुछ लोगों की यह गलतफहमी होती है कि फिनाइल और कीटनाशक डालने से घाव में कीड़े मर जाते हैं जबकि यह गलत है, इससे घाव और खराब होता है साथही विषेले पदार्थ और शरीर में पहुच जाते है। इससे बेहतर तारफिन तेल, मिट्टी का तेल या मेगेट मारने वाली दवाएं उपयोग करनी चाहिए। कुछ पशु मालिकों को लगता हैकि कुत्तों अथवा जानवरों के स्वयं अपने घाव चाटने से ठीक हो जाते है जबकि यह सिर्फ गलतफहमी ही है।


घाव की देखभाल एवं प्रबंधन


सामान्यतः साधरण घाव स्वतः प्राकृतिक तरह से 14 दिनों में ठीक हो जाते हैं। जबकि त्वचा के बड़े घाव भरने में अधिक समय लगता है। इसीलिए, घाव भरना शुरु होने के लिए सही देखवाल रखना बहुत जरूरी होता है। घाव रेशेदार संयोजी ऊतक और कणिकायन ऊतक के प्रसार से भरता है। सबसे पहली एवं महत्वपूर्ण बात घाव को संक्रमित होने से बचाना है। इस प्रक्रिया के दोरान शरीर उत्तेजकों को खत्म अथवा हटाने की कोशिश करता है और प्रभावित हिस्से को सामान्य स्तिथि में लाता है। कोई भी घाव जिसे 6 घंटे हो गए हो उसे संक्रमित घाव कहा जाता है।
घाव भरते समय उस जगह खुजली होती है जिससे जानवर उसे स्वयं विकृत कर लेता है। पालतु जानवरों मैं यह प्राय रूप से देखने को मिलता है। वह सिर्फ घाव को काटते हि नहीं बल्कि अपने पंजो से खरोंचते भी हैं। एलिजाबेथ कॉलर के उपयोग से इस समस्या से बचा जा सकता है। जबभी किसी पशु को चोट लगती है, सबसे पहले जरूरी हैकि खून का बहना रोकना चाहिए तत्पश्चात पशु चिकित्सक को दिखाया जाए। खून को साफ कपड़े या पट्टी से दवाकर अथवा कसकर बांधने से रोका जा सकता है। फिरभी अगर खून नहीं रुकता तो, बंधे हुए हिस्से पर बर्फ या टिंचर बेन्जोइन लगाने से लाभ होता है। अधिक खून बहने से शरीर में खून की कमी हो जाती है। जब पेट पर घाव की वजह से अंतड़ी बाहर आ जाए तो, उस बाहर निकले हुए हिस्से को साफ कपड़ेध्पट्टी से ढककर नार्मल सेलाइन से भिगोते रहने से बचा सकते है फिर पशुचिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।
घाव में मवाद का पड़ना बुरा लक्षण होता है। ऐसे मामलों में, घाव की जगह को एंटीसेप्टिक से अच्छी तरह धोकर मवाद बनाने वाली झिल्ली को नष्ट कर देना चाहिए। फोड़े की गुहा 10ः पोविडोन आयोडीन या अक्रिफ्लाविन (1ः2000) घोल से रगड़कर सफाई करने से और साथ में पशुचिकित्सक द्वारा दिए एंटीबायोटिक्स और दर्दनिवारक की सहायता से मवाद वाले संक्रमण को कम किया जा सकता है।


हल्दी अथवा एलो वेरा का पारंपरिक इस्तेमाल सदियों से घाव में किया जाता है। नए उपलभ्द सडन रोकने वाली दवाएं जेसेकि क्लोर्हेक्सिडीन, पोविडोन आयोडीन यहाँ तक कि कैलेंडुला (होम्योपैथिक दवा) घाव भरने मेंबहुत प्रभावी हैं। पोटैशियम पेरमेंगनेट (1ः1000) घोल को भी बड़े घावों को धोने के लिए उपयोग किया जाता है। मुख्य इरादा घाव को संक्रमण से बचाना होता है। घाव को साफ रखना थोडा मुश्किल होता है पर जब घाव को साफ रखा जाता है तो घाव प्रभावी तरीके से ठीक होता है। युकलिप्टुस और तारफिन का तेल बहुत अच्छा मगेटनाशक घटक होता है जोकि मगेट मारने में उपयोगी होता है। नीम और करंजा का तेल अति उत्कृष्ट मक्खी विकर्षक है जिसको घाव पर मक्खियों के बैठने को रोकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बाजार में बहुत विविध प्रकार के उत्पाद समेत हर्बल फुहारें और मल्लम भी उपलभ्द हैं जिनका उपयोग भी घाव और चोटों में लाभप्रद है।


कुत्ते काटे घावः इसका आमतौर पर सामना किया जाता है और जानवरों में यह सबसे अवांछित चोट होती है। जेसे ही किसी पालतु जानवर या मवेशी को कुत्ता काटता है जितनी शीघ्र हो सके घाव को सेव्लोन या साबुन से अच्छी तरह हाथों में दस्ताने पहनकर धोना चाहिए तत्पश्चात पशुचिकित्सक को सम्पर्क करना चाहिए। अपने पालतु पशु को सालाना वैक्सीन लगवानी चाहिए जिससे रेबीज बीमारी का बचाव होता है।


घाव के दोरान टिटनेस का खतराः भेड़, बकरी अथवा घोड़ों में टिटनेस का खतरा अधिक होता है। टिटनेस एक जूनोटिक बीमारी है। इस बीमारी के विषाणु मुख्यतः मिट्टी, गोबर में ही पाए जाते हैं। इसीलिए इन जानवरों को चोट, घाव अथवा ऑपरेशन होने पर पशुचिकित्सक परामर्श पर टिटनेस की वैक्सीन लगाना जरुरी होता है।