नानाजी देशमुख वेटनरी साईंन्स यूनिवर्सिटी, जबलपुर

टीकाकरण का महत्व एवं सावधानिया

पषु हो या मनुष्य उनमें टीकाकरण के क्या फायदे हैं। इसकी जागरूकता होना जरूरी है। सबसे पहले हमें दो षब्दों का मतलब पता होना जरूरी है- एक है ‘‘उपचार’’ दूसरा ’’रोकथाक’’। पषुओं में बीमारी होने के बाद दवाईयों द्वारा जो इलाज किया जाता है उसको ‘‘उपचार’’ कहते हैं। परन्तु पषुओं में संक्रमक बीमारियों न फैले तो ऐतिहात के तौर पर पहले से ही जो टीेके लगाए जाते हैं उसको रोकथाम कहते हैं।

टीका क्या है ?

टीका एक स्वास्थ्य उत्पाद है जो कि पषुओं की प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है एवं विभिन्न रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है। टीकाकरण के द्वारा पषुओं को आने वाले समय में संक्रामक बीमारियों के बचाया जा सकता है। संक्रामक रोगों के कई कारक है- जीवाणु, विषाणु, परजीवी, इत्यादि। टीका इन विभिन्न तरह के रोगों से लड़ने के लिए षरीर को तैयार करता है। प्रत्येक रोग का टीका अलग होता हैं। एक रोग का टीका दूसरे रोग से बचाव नहीं कर सकता। 

टीकाकरण का क्या महत्व है ?

यदि पषुपालक आर्थिक लाभ चाहते हैं तो पषु स्वास्थ्य एवं टीकाकरण का महत्वपूर्ण स्थान है। प्रतिवर्ष हजारों दुधारू पषु खतरनाक संक्रामक बीमारियों के कारण मर जाते हैं जिससे आर्थिक नुकसान होता है। बहुत से जीवाणुजनित रोग लाइलाज है तो इनका एक ही विकल्प है‘‘टीकाकरण के द्वारा रोकथाम’’। पषुपालकों का यह कर्तव्य बनता है कि पषुचिकित्सक की सलाह ले कर वह अपने पषुओं का उचित समय एवं उचित आयु में टीकाकरण करवाएॅं।  टीके कभी भी पषुओं के षरीर पर कोई दुष्प्रभाव नहीं डालते हैं। गर्भिन पषुओं में भी टीके का कोई दुष्प्रभाव नहीं है।

नियमित टीकाकरण द्वारा पषुपालक न सिर्फ दवाईयों पर होने वाले खर्च को कम कर सकते हैं बल्कि एक बेहतर उत्पदान भी प्राप्त कर सकते हैं। 

तो टीकाकरण के केई फायदे है –

1 टीकारण संक्रामक रोगोे से जानवरों की रक्षा करता है।

2 टीकाकरण के द्वारा पषुओं से मनुष्यों में फैलने वाले रोगों को भी रोका जा सकता है। 

3 टीकाकरण रोगों से जुड़े उपचार की लागत को कम कर किसानों पर आर्थिक बोझ को कम करने में मदद करता है। 

परंतु ऐसी क्या असावधानियां है जो टीकाकरण के कार्यक्रम को असफल कर देती है। पषुओं में टीकाकरण पूरे वर्ष क्षेत्र एवं मौसम के हिसाब से किया जाता है। असावधानियों से बचने के लिए टीकारण कार्यक्रम पषुचिकित्सक की निगरानी में ही करवाना चाहिए। टीका बनाने वाली कंपनियां बहुत ही सावधानी से टीका बनाती है एवं टीके के प्रयोग के बारे में जानकारी देते है। 

सावधानिया

टीकों के इस्तेमाल के दौरान कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। 

   1 टीका किस उम्र में लगाना है इसका ध्यान रखना जरूरी है। गलत उम्र में टीका लगाने पर उसका प्रभाव कम हो सकता है। 

   2 उचित मौसम- टीका  किस मौसम के पहले या किस माह में लगाना है।  

   3 टीका खरीदने के बाद साफ जगह पर रखें, उचित तापमान पर उसका संग्रहण करें।

   5 टीके की मात्रा भी निष्चित होती है। यदि मात्रा कम होगी तो उसका सही प्रभाव नहीं मिलेगा। 

   6 टीकाकरण कार्यक्रम अधिकतर सुबह के वक्त ही रखा जाता है। तेज गर्मी, सूर्य की तेज रोषनी से टीका खराब हो सकता है। 

  7 बाहरी राज्यों से लाये गए पषुओं को या नए खरीदे गए पषुओं को कुछ दिन अलग रखना चाहिए।

  8 उन पषुओं का टीकाकरण किया गया या नहीं उसका प्रमाणपत्र होना चाहिए।

  9 उनको कौन-कौन से टीके लगाये गए है उसका लेखा होना चाहिए।

  10 टीकाकरण करवाने से पूर्व पषुओं को परजीवीः नाषक दवा पषु चिकित्सक की सलाह पर देनी चाहिए।

  11 रोगी एवं दुर्बल पषुओं में टीकाकरण न करे। 

  12 पषुओं का टीकाकरण प्रभावषाली हो इसलिए पषुओं का अच्छा रखरखाव करें। पषुबाड़ों में साफसफाई   रखें । 

13 टीकाकरण किए गये पषुओं को बिना टीका दिये गए पषुओं या बीमार पषुओं से अलग रखें।

14 टीकाकरण के तुरंत बाद पषुओं का ज्यादा व्यायाम न करवाए, खराब मौसम से भी बचाव करें। 

15 जहाॅ तक हो सके, टीकाकरण के बाद दो सप्ताह तक अन्य दवाईयों का इस्तमाल न करें। 

तो यह निष्कर्ष निकलता है कि पषु उपचार से बेहतर है रोकथाम जो कि सिर्फ टीकाकरण के द्वारा ही संभव है। परंतु टीकाकरण तभी सफल होगा जब सावधानीपूर्वक किया जाए। पषुओं में विभिन्न रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण उचित आयु, उचित मौसम, उचित समय, उचित मात्रा में, उचित जगह पर, उचित मार्ग से तथा उचित टीकों के प्रयोग द्वारा ही संभव है।