थनों को सूखा और साफ रखना (24×7)


डेयरी में ऐसी व्यवस्था रहे कि दुधारु पशुओं के थन हमेशा (24 घण्टे व सातों दिन) सूखा और साफ रहे। गीला व गंदे थन में जीवाणु आसानी सेे दूध बनाने वाली ग्रंथियों में संक्रमण कर थनैला रोग करते हैं। सभी दुधारु पशुओं को दुहनेे के बाद थन का आयोडिन व ग्लिसरिन युक्त घोल (टीट डीप) से विसंक्रमित करना चाहिये।

सभी थनैला रोग ग्रसित दुधारु पशुओं को पहचानना एवं त्वरित इलाज।


हर सप्ताह डेयरी में दुधारु पशुओं का कैलीफोर्निया मैस्टाइटिस टेस्ट (सी. एम. टी)़ द्वारा थनैला रोग से ग्रस्त दुधारु पशुओं को पहचान करें। तथा ऐसे पशुओं का पशु चिकित्सक से त्वरित इलाज करवाना चाहिये।

दुधारु पशुओं का शुष्क अवस्था में इलाज ;क्तल बवू जीमतंचलद्ध
दुधारु पशु के शुष्क अवस्था (ड्राइ अवधि) में प्रवेश के दिवस में थन में ऐसी अवस्था के लिये उपयुक्त एंटीबायोटिक के द्वारा इलाज को ड्राइ काउ थेरेपी कहा जाता है। इस प्रकार के इलाज से थन से थन में फैलने वाले थनैला तथा ब्यात के बाद होने वाले थनैला का बेहतर रोकथाम हो पाता है। पशु चिकित्सक की सलाह से सभी दुधारु पशुओं का इलाज करवाना चाहिये।

ऐसे दुधारु पशुओं को हटायें जिनका थनैला रोग लाइलाज हो गया है।
ऐसे दुधारु पशु जिनकी दूध देने के लगभग 300 दिन के अवधि में तीन से ज्यादा बार थनैला का इलाज करवाना पडा हैं उन्हें डेयरी से हटा देना चाहिये। ऐसे पशु के थन से दुसरे पशु के स्वस्थ थन में रोग फैलता है।