दुग्ध उत्पादों का प्रसंस्करण; किसानो के लाभ कमाने का आधार

दूध या दुग्ध उत्पादन में हमारा देश प्रथम स्थान पर है और करीब 176  एम.टी. दूध का उत्पादन हमने वर्ष 2017&18 में किया है। हर वर्ष लगातार यह उत्पादन बढ़ रहा है और अमेरिका जैसे देश भी हमसे काफी पीछे है। किन्तु यदि प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता देखेंगे तो यह करीब 375 ग्राम/दिन है जो कि बहुत कम है। अतः हमें और दूध उत्पादन की अभी भी जरूरत है। 

डेयरी में उत्पादन के अतिरिक्त दूध का प्रसंस्करण एक बहुत बड़ा उद्योग है किन्तु हमारे देश में कुल दूध उत्पादन का मात्र 20 प्रतिशत दूध ही व्यवस्थित तरीके से प्रसंस्करण किया जा रहा है। अतः 80 प्रतिशत दूध अभी भी गैर व्यवस्थित इकाइयों का हिस्सा है जो कि आने वाले समय में एक व्यवस्थित उद्योग का हिस्सा बनेगा] क्योंकि समय के साथ कड़े नियम/कानून का प्रभाव पड़ेगा। अतः इस प्रसंस्करण के क्षेत्र में अभी बहुत ढेर सारे अवसर उपलब्ध है। इस 80 प्रतिशत दूध को प्रसंस्करित करने के लिए उनके इकाइयों की जरूरत पड़ेगी। आज के समय में अगर हम ध्यान दे तो पायेंगे कि बाजार में सबसे अधिक अगर कोई दुग्ध उत्पाद उपलब्ध है तो वह है पाश्चुरिकृत दूध जो कि 1 वा 1@2 किलोग्राम के पैक में उलब्ध होता है और वसा के आधार पर इसके अलग-अलग प्रकार होते हैं। इसके अतिरिक्त खोआ] दही] पनीर इत्यादि भी बाजार में प्रमुखता से पाये जाते हैं। पाश्चुरिकृत दूध के उत्पादन हेतु दो तरह के प्लांट लगाये जा सकते है। इनमें लगभग 1000 लीटर तक के छोटे प्लांट आते है जो कि एलटी एलटी कहलाते है और इसमें 630C पर दूध को 30 मिनट तक गरम किया जाता है और ज्यादा दूध पाश्चुरिकृत करने के लिये एचटीएसटी नामक बड़े आकार के प्लांट आते हैं जहाँ दूध को इसमें 720C पर 15 सेकेन्ड के लिये गरम करके इसमें 50C पर तुरन्त ठंडा करते है जिससे रोग कारक जीवाणु नष्ट हो जाते हैं। 

किसान/पशुपालक भाई यदि चाहे तो लाभ कमाने के लिये बहुत बड़ा प्लांट न बैठाकर प्रसंस्करण का कार्य छोटे इकाई में भी कर सकते है। कुछ उत्पाद जैसे कि पनीर] दही] घी] मावा इत्यादि को छोटी इकाई में भी बनाया जा सकता है और थोड़ी सी सावधानी लेते हुये उच्च गुणवत्ता के ये उप्पाद आसपास के बाजार या हलवाई के पास बेचने से अच्छी आमदनी का जरिया बन सकते है। अब यहाँ पर यदि हम पनीर जैसे उत्पाद की चर्चा करें तो पायेंगे कि लगभग 5 किलो भैंस के दूध से 1 किलो परीर बनाया जा सकता है और गाँव में 5 किलो भैंस  के दूध की कीमत लगभग 150 (5X30) रूपये होती है जबकि पनीर की बाजार कीमत लगभग 280 रूपये है। अतः 130 रूपये का फर्क हम सिर्फ प्रसंस्करण के माध्यम से मात्र 5 किलो दूध से प्राप्त कर सकते हैं। यदि इसके 10-20 रूपये खर्चा भी जोड़ ले तो 100 से ज्यादा का मुनाफा है। इसी कार्य को जब हम सीख जायें तो ज्यादा दूध प्रसंस्करण करके ज्यादा फायदा कमा सकते हैं। 

NABARD जैसी संस्थाये बराबर इस तरह के कार्यों को प्रोत्साहन करती है और अभी भी 33 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान ऐसी योजनाओं के लिए 2019-20 में चल रहा है। इसमें सामान्य वर्ग के लिए 25 प्रतिशत तथा अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए 33 प्रतिशत सब्सिडी का लाभ किसान भाई ले सकते हैं। 

एक बड़ी प्रसंस्करण इकाई को स्थापित करने से पहले किसान भाइयों को अधिक दूध की उपलब्धता सुनिश्चित करनी होती है तथा बने हुये उत्पाद के लिए बड़े बाजार का नजदीक होना अति आवश्यक है। जहाँ आसानी से उत्पाद को बेचा जा सके।

Related image
E:\official photo\New folder (2)\IMG_2653.JPG
E:\official photo\New folder (2)\IMG_2695.JPG
E:\official photo\New folder (2)\IMG_2608.JPG