दूध की तुलना में दुग्ध के उत्पाद की संग्रह आयु (shelf life ) अपेक्षाकृत अधिक होती है साथ ही दुग्ध के
उत्पाद बनाकर जिसको मूल्य संवर्धन भी कहते है को उचित दाम पर बेचकर हम अपनी आय को भी बढ़ा सकते हैI
दुग्ध-उत्पाद या डेयरी उत्पाद से अभिप्राय उन खाद्य वस्तुओं से है जो दूध से बनती हैं। यह आम तौर पर उच्च
ऊर्जा प्रदान करने वाले खाद्य पदार्थ होते हैं। उत्पादन विधि के आधार पर इन दुग्ध पदार्थों को 5 प्रमुख समूहों में
विभक्त किया गया है:

1. संघनितदुग्धपदार्थ (Condensed/ Heat Desiccated Milk Products)- इस वर्ग खोआ तथा इससे निर्मित मिठाइयाँ जैसे- गुलाब जामुन, बर्फी तथा पेड़ा आदि आते हैं ।

2. उष्मातथाअम्लअवक्षेपितपदार्थ (Heat and Acid Precipitated Products)- छैना, पनीर, संदेश, पैन्टूआ, रसगोला आदि पदार्थ को इस समूह में सम्मिलित किया गया है ।

3. किण्वितदुग्धपदार्थ (Cultured Milk Product)- दही, मक्खन, छाछ, लस्सी, तथा श्रीखंड इस वर्ग के पदार्थ हैI

4. उच्चवसायुक्तउत्पाद (High Fat Products)- जैसे- क्रीम, मक्खन, घी आदि।

5. हिमीकृतपदार्थ (Frozen Products)- जैसे- कुल्फी, मलाई का बर्फ, आईस कैंडी आदि।

उपरोक्त पदार्थों का उत्पादन घरों में भी किया जा सकता है । इनमें से कुछ की उत्पादन विधि का मानकीकरण हो चुका है जिनका व्यवसायिक स्तर पर संगठित क्षेत्र के दुग्ध संयन्त्रों द्वारा किया जा रहा है । वैसे उपरोक्त सभी पदार्थ असंगठित क्षेत्र के व्यापारियों द्वारा व्यवसायिक स्तर पर दुकानों में तैयार किये जा रहे हैं । 

जैसा की हम जानते है कि दूध को बिना ठण्डा किये मात्र कुछ घंटों तक ही रखा जा सकता है जबकि छैना को तीन दिन, पनीर को 3 दिन, खोआ को चार दिन, खुरचन व रबड़ी को 3-3 दिन तथा घी को 10-12 माह तक संग्रह किया जा सकता है । आजकल प्रशीतन क्रिया का विकास होने पर प्रशीतित दशा में इन पदार्थों को घरों में ओर अधिक समय तक बिना खराब हुए संग्रह किया जा सकता है । देशी पदार्थों की गुणवत्ता तथा संग्रह आयु के सुधार के लिए नई तकनीकी का प्रयोग भी आज होने लगा है ।

परम्परागत दुग्ध पदार्थ निर्माण विधि का संक्षिप्त प्रवाही आरेख

मक्खन की उत्पादन विधि (Production Method):

मक्खन, वैदिक काल का बहुत महत्वपूर्ण पदार्थ रहा है । यह पूरे देश में बनाया जाता है । परम्परागत रूप में मक्खन का उपयोग घी बनाने में उपयोग किया जाता है । इस प्रकार घी उत्पादन का यह एक माध्यमिक पदार्थ है । इसको बनाने के लिए दही में ठण्डा पानी मिलाकर उसे मिट्टी के बर्तन में लकड़ी की मथानी से हाथ द्वारा मथा जाता है । मक्खन के दाने मक्खनियाँ दूध की सतह पर एकत्र हो जाते हैं जिन्हें हाथ द्वारा एकत्र कर लिया जाता है । इन एकत्रित कणों को इकट्ठा करके मुलायम सघन पदार्थ (Smooth Compact Mass) के रूप में निकाल लिया जाता है । भैंस के दूध से सफेद मक्खन बनता है जबकि गाय के दूध से निर्मित मक्खन रंग में पीलापन लिए होता है । यह रंग दूध में उपस्थित कैरोटीन के कारण होता है । मक्खन में सुहावनी व सघन डाईऐसिटाईल सुगन्ध (Rich Diacetyle Flavour) पायी जाती है । मक्खन में 78-80% बसा, 1.5 to 2.0% SNF तथा 15-20% नमी पायी जाती है ।

कुल्फी की उत्पादन विधि (Production Method):

कुल्फी, मलाई की कुल्फी या मलाई का बर्फ एक हिमीकृत दुग्ध उत्पाद है जिसका संगठन पतली क्रीम के समान होता है । यह बहुत स्वादिष्ट तथा पौष्टिक पदार्थ है । भारत में कुल दुग्ध उत्पादन का 0.6% भाग कुल्फी निर्माण में प्रयोग किया जाता है । ये पोषण तथा स्वाद के लिए खाये जाते हैं । अब स्वास्थ्यवर्धक Probiotic कुल्फी निर्माण पर अनुसन्धान कार्य प्रगति पर है । Probiotic का अर्थ है कि वे पदार्थ या जीव जो आन्तीय सूक्ष्मजीव सन्तुलन (Intestinal Microbial Balance) बनाये रखते हैं । इस वर्ग में मुख्यतया लाभकारी जीवाणु आते हैं । कुल्फी के लिए निर्धारित वैधानिक मानक स्पष्ट नहीं है तथा आईसक्रीम के लिए निर्धारित संगठन के मिश्रण से ही कुल्फी तैयार की जाती है ।  परम्परागत रूप से तैयार की जा रही कुल्फी के संघटकों का स्तर आईसक्रीम से निम्न होता है तथा आईसक्रीम की तरह इससे Overrun भी नहीं होता है:

  इसको बनाने की लिए दूध को 5% वसा तथा 8.5% वसा रहित ठोस स्तर पर मानकीकृत करके वाष्पीकरण द्वारा 2:1 के अनुपात में गाढ़ा करते हैं । संघनन क्रिया उपरान्त उसमें गाढ़े दूध का लगभग 13% चीनी मिलाते हैं । सान्द्रण (Concentration) के समय ही 0.3% जिलेटिन या सोडियम एल्वीनेट व 0.2% Glycerol Monosterate (GMS) मिलाया जाता है । सान्द्र विलयन को 30°C ताप पर ठण्डा करके सुवास, रंग तथा मेवा मिलाकर कुल्फी मोल्ड में भर लिया जाता है । इन्हें बन्द करके -20°C ताप पर हिमीकरण के लिए रखते हैं ।

कुल्फी का उपयोग गर्मी के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत रुचि के साथ किया जाता है । वसा तथा प्रोटीन का यह एक अच्छा स्रोत है । इसमें वसा विलेय विटामिन तथा जल विलेय विटामिन भी प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं । संवर्धित दूध से बनी कुल्फी में ओषधीय गुण भी पाये जाते हैं ।

Dr.N.K.Nayak

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