दूध पास्चुरीकरण एवं पैकेजिंग इकाई∶ एक छोटा व्यवसाय

डेरी उद्योग एक पशुपालन से जुड़ा एक बहुत लोकप्रिय उद्योग है जिसके अंतर्गत दुग्ध उत्पादनए उसकी प्रोसेसिंग और खुदरा बिक्री के लिए किए जाने वाले कार्य आते हैं। भारत पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा दुग्ध उत्पादन करने वाला देश है। वित्त वर्ष 2018.19 में भारत में करीब 187ण्75 मीट्रिक टन दूध का उत्पादन हुआ था। जिस तरह से भारत में लगातार दूध की मांग बढती जा रही है उस लिहाज से देश में डेयरी उद्योग को बढावा दिए जाने की जरूरत है ताकि रोजाना बढ रही दूध की खपत को पूरा किया जा सके। और इसके लिए जरूरी है कि भारत में नई और आधुनिक डेयरी तकनीकि का इस्तेमाल किया जाए ताकि तमाम डेयरी प्रोडक्ट कंपनियां और डेयरी फार्म ज्यादा से ज्यादा दूध और दुग्ध उत्पादों का उत्पादन कर सकें। डेरी उद्योग में अधिक से अधिक अवसर है और नया उद्यमी या युवा इससे लाभ प्राप्त कर सकता है। इस में दूध का पास्चुरीकरणए पैकेजिंग एवं प्रसंस्करण शामिल है। दूध का पास्चुरीकरण एवं पैकेजिंग को भी हम रोजगार के रूप में देख सकते है। इसके अलावा दूध प्रसंस्करण विकल्प तो खुला हुआ है ही ।
दूध पास्चुरीकरण एवं पैकेजिंग इकाईरू
इस इकाई में दूध का पास्चुरीकरण एवं पैकेजिंग कर बेचा जा सकता है। इस में पास्चुरीकरण एवं पैकेजिंग दो मुख्य प्रक्रिया है।
पास्चुरीकरणरू पास्चुरीकरण प्रक्रिया में संभावित हानिकारक रोगजनकों को नष्ट करने के लिए दूध को पुनरू संदूषण के बिना एक निश्चित अवधि के लिए पूर्व निर्धारित तापमान पर गर्म किया जाता है। पास्चुरीकरण का मुख्य उद्देश्यए दूध को सुरक्षित करना और दूध की गुणवत्ता बनाए रखना है।

पास्चुरीकरण की मुख्य विधिरू
1- धारण विधि या बैच ;एल॰टी॰एल॰टी॰द्ध पास्चुरीकरण
इस विधि में दूध को कम से कम आधे घंटे तक 63 से 66 डिग्री॰ से॰ तापमान तक गर्म किया जाता है और फिर तुरत ही इसे 5 से॰ तापमान तक ठंडा कर लिया जाता है । यह छोटे पैमाने पर दूध को रोगजनकों से मुक्त करने की तथा गाँव में उपयोग आने वाली एक अच्छी विधि है ।
2- उच्च ताप अल्प कालीन ;एच॰टी॰एस॰टी॰द्ध या फ्लैश विधि पास्चुरीकरण
इस विधि में दूध को लगभग 15 सेकंड तक 72′ तापमान तक गर्म किया जाता है और फिर तुरंत ही इसे 4०’ तापमान पर ठंडा कर लिया जाता है । आजकल इस विधि का सर्वाधिक उपयोग होता है । यह विधि अधिक दूध का पाश्चुरीकरण करने के लिए उपयोगी होती है ।
दूध पास्चुरीकरण एवं पैकेजिंग इकाई में उपयोग आने वाले उपकरणों की कुल लागत लगभग 10 लाख के आस.पास आएगी है । इन नाम इस प्रकार है ।
दूध की पैकेजिंगरू
दूध की सबसे अच्छी कीमत के लिए दूध की पैकिंग आवश्यक है । पैकेजिंग के मुख्य कार्य आवरणए सुरक्षाए प्रदर्शनए स्थानांतरण आदि शामिल हैंए जिनमें सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरणए भौतिकए रासायनिक और सूक्ष्म जीव जैसे जोखिम से सुरक्षा है । स्वचालित ;ऑटोमैटिकद्ध दूध पैकिंग मशीन इसके लिए एक अच्छा विकल्प है।
आजकल इस तरह की मशीन आ गई कि दूध के ठंडा.गर्म होने से लेकर पाश्चुरीकरण और पैकिंग तक का हर काम ऑटोमैटिक होगा। इस दूध को न तो कोई हाथ लगा पाएगाए न ही कोई देख पाएगा। पूरी प्रक्रिया में अब दूध की एक बूंद भी नीचे नहीं गिरेगी। सारा काम कम्प्यूटर को कमांड देने पर होता जाएगा।
दूध की गुणवत्ता जांचरू
मिल्क एनालाइजर के जरिए दूध की क्वालिटी जांच की जाती है। इस जांच में दूध में मौजूद फैटए सॉलिड नॉट फैटी ;ैछथ्द्ध की मात्राए दूध की डेंसिटीए दूध में किसी तरह की मिलावटए पानी की मात्रा आदि का पता लगाया जाता है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जांच के बाद मानक के मुताबिक परिणाम को लिखा जाता है ।
उपकरण एवं लागतरू
दूध पास्चुरीकरण एवं पैकेजिंग इकाई में उपयोग आने वाले उपकरणों के नाम इस प्रकार है ।
1- दूध रखने के लिए टैंक
2- पास्चुरीकरण मशीन
3- बल्क मिल्क कूलिंग टैंक
4- मिल्क एनालाइजर
5- पैकेजिंग मशीन
6- कोल्ड स्टोरेज सुविधा
दूध पास्चुरीकरण एवं पैकेजिंग इकाई को स्थापित करने में कुल लागत लगभग 10 लाख के आस.पास आएगी ।