पशुओं में पशु पोषण सम्बंधित समस्याएं एवं समाधान


परिचय
पशु व्यवसाय में लाभ मुख्यतः तीन कारकों जैसे पशु की नस्ल, पशु प्रबंधन एवं पशु पोषण पर निर्भर करता है। पशुओं की विकास दर एवं उत्पादकता वृद्धि में पशु पोषण एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उपयुक्त आहार यह सुनिश्चित करता है कि पशु अपना वांछित शारीरिक वजन पा ले, अधिक उत्पादन करे तथा स्वस्थ रहे। दुधारू पशुओं, मुर्गी पर होने वाले कुल खर्च में से 70 प्रतिशत भाग अकेले उसके आहार पर होता है, जिससे उसका महत्व और भी बढ़ जाता है। पशुपालकों के लिए आवश्यक है कि वह पशुओं के प्रतिदिन आहार की उचित व्यवस्था करें। इस प्रकार पशुओं के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है कि उन्हें प्रतिदिन उचित मात्रा में पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार मिलना चाहिए। पशुपालकों को जानकारी होनी चाहिए कि उन्हें किस मात्रा में कौन सा आहार मिलना चाहिए।
खुराक
पशुओं द्वारा भूख को शांत करने के लिए एक समय में जो भोजन खाया जाता है उसे खुराक कहते हैं।
आहार
वैज्ञानिक दृष्टि से दुधारू पशुओं के शरीर के भार के अनुसार उसकी आवश्यकताओं जसे जीवन निर्वाह, विकास तथा उत्पादन आदि के लिए भोजन के विभिन्न तत्व जैसे प्रोटीन, कार्बोहायड्रेट्स, वसा, खनिज, विटामिन तथा पानी की आवश्यकता होती है। पशु को 24 घण्टों में खिलाया जाने वाला आहार दाना व चाराद्ध जिसमें उनकी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतू भोज्य तत्व मौजूद हों, पशु आहार कहते है
पशु आहार के आवश्यक तत्व
पशु का शरीर 75ःए जल 20ः प्रोटीनए 5ः खनिज पदार्थों एवं 1ः से भी कम कार्बोहैड्रेट का बना होता है। शरीर की संरचना पर आयु व पोषण का बहुत प्रभाव होता है, बढ़ती उम्र के साथ जल की मात्रा में कमी परन्तु वसा में वृद्धि होती है।
-कार्बोहाईडेट
-प्रोटीन
-वसा
-खनिज लवण
-विटामिन
-पानी
-कार्बोहाईडेट

कार्बोहाइड्रेट मुख्यतरू शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसकी मात्रा पशुओं के चारे में सबसे अधिक होती है । कार्बोहाइड्रेट दो तरह के होते हैं। इसमें शर्कराए मॉडए हेमीसेल्युलोज ज्यादा पाचनशील तथा सेल्युलोज और सेल्युलोज से जुड़ा हैमिसेल्युलोज कम पाचनशील होता है।यह हरा चाराए भूसाए कड़वी तथा सभी अनाजों से प्राप्त होते हैं।
प्रोटीन
प्रोटीन शरीर की संरचना का एक प्रमुख तत्व है। यह प्रत्येक कोशिका की दीवारों तथा आंतरिक संरचना का प्रमुख अवयव है। शरीर की वृद्धिए गर्भस्थ शिशु की वृद्धि तथा दूध उत्पादन के लिए प्रोटीन आवश्यक होती है। कोशिकाओं की टूट.फूट की मरम्मत के लिए भी प्रोटीन बहुत जरूरी होती है। पशु को प्रोटीन मुख्य रूप से खलीए दालों तथा फलीदार चारे जैसे बरसीमए रिजकाए लोबियाए ग्वार आदि से प्राप्त होती है।
वसा
पानी में न घुलने वाले चिकने पदार्थ जैसे घीए तेल इत्यादि वसा कहलाते हैं। कोशिकाओं की संरचना के लिए वसा एक आवश्यक तत्व है। यह त्वचा के नीचे या अन्य स्थानों पर जमा होकरए ऊर्जा के भंडार के रूप में काम आती है एवम् भोजन की कमी के दौरान उपयोग में आती है। पशु के आहार में लगभग 3.5 प्रतिशत वसा की आवश्यकता होती है जो उसे आसानी से चारे और दाने से प्राप्त हो जाती है। वसा के मुख्य स्रोत . बिनौलाए तिलहनए सोयाबीन व विभिन्न प्रकार की खलें हैं।

खनिज लवण
खनिज लवण मुख्यतरू हड्डियों तथा दांतों की रचना के मुख्य भाग हैं तथा दूध में भी काफी मात्रा में स्रावित होते हैं। ये शरीर के एन्जाइम और विटामिनों के निर्माण में काम आकर शरीर की कर्इ महत्वपूर्ण क्रियाओं को निष्पादित करते हैं। इनकी कमी से शरीर में कर्इ प्रकार की बीमारियाँ हो जाती हैं। कैल्शियमए फॉस्फोरसए पोटैशियमए सोडियमए क्लोरीनए गंधकए मैग्निशियमए मैंगनीजए लोहाए तांबाए जस्ताए कोबाल्टए आयोडीनए सेलेनियम इत्यादि शरीर के लिए आवश्यक प्रमुख लवण हैं। दूध उत्पादन की अवस्था में भैंस को कैल्शियम तथा फास्फोरस की अधिक आवश्यकता होती है। प्रसूति काल में इसकी कमी से दुग्ध ज्वर हो जाता है तथा बाद की अवस्थाओं में दूध उत्पादन घट जाता है एवम् प्रजनन दर में भी कमी आती है। कैल्शियम की कमी के कारण गाभिन भैंसें फूल दिखाती हैं। क्योंकि चारे में उपस्थित खनिज लवण भैंस की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं कर पातेए इसलिए खनिज लवणों को अलग से खिलाना आवश्यक है।

विटामिन
शरीर की सामान्य क्रियाशीलता के लिए पशु को विभिन्न विटामिनों की आवश्यकता होती है। ये विटामिन उसे आमतौर पर हरे चारे से पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध हो जाते हैं। विटामिन ष्बीष् तो जुगाली करने वाले पशुओं के पेट में उपस्थित सूक्ष्म जीवाणुओं द्वारा पर्याप्त मात्रा में संश्लेषित होता है। अन्य विटामिन जैसे एए सीए डीए र्इ तथा केए पशुओं को चारे और दाने द्वारा मिल जाते हैं। विटामिन ए की कमी से भैंसो में गर्भपातए अंधापनए चमड़ी का सूखापनए भूख की कमीए गर्मी में न आना तथा गर्भ का न रूकना आदि समस्यायें हो जाती हैं।

पानी
पशु शरीर में लगभग 75ः पानी होता हैए एक सामान्य पशु के लिए 35.40 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।
कार्य: दूध बनानाए पोषक तत्वों को एक जगह से दूसरी जगह ले जानाए रक्त निर्माणए शरीर का तापक्रमए पाचन शक्ति बढ़ाना।
स्रोत: हरा चारा एवं स्वच्छ पानी
अतः पशुओं को स्वास्थ्य रखें के लिए सम्पूर्ण तत्वों युक्त भोजन एक निशिचत अनुपात एवं मात्रा में खिलाएं। विभिन्न प्रकार के पशुओं के लिए अलग.अलग प्रकार का आहार देना चाहिए।
पशु आहार
पशु आहार का वर्गीकरण उनमें पाए जाने वाले तत्वों के आधार पर निम्न प्रकार से किया जाता है।
पशुधन को खिलाने में उपयोग किए जाने वाले विभिन्न फ़ीड्स और फ़ोडर्स को मोटे तौर पर निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया जाता हैरू
कद्ध चारा
खद्ध दाना
गद्ध पूरक फ़ीड
घद्ध योजक फ़ीड
कद्ध चारा फ़ीड सामग्री जिसमें 18 प्रतिशत से अधिक कच्चे फाइबर और 60 प्रतिशत से कम कुल पाचन पोषक तत्व होते हैं। उच्च क्रूड फाइबर सामग्री के कारणए वे अधिक भारी होते हैं और दाने की तुलना में उनकी पाचन क्षमता कम होती है। 1द्ध रखरखाव के प्रकार . जिसमें 3.5 प्रतिशत डीसीपी है। ;डीसीपी . डाइजेस्टिबल क्रूड प्रोटीनद्ध। हरी मक्काए जई। 2द्ध गैर.रखरखाव प्रकार . जिसमें 3 प्रतिशत से कम डीसीपी उदा। पुआलए कडबी। 3द्ध उत्पादन प्रकार . जिसमें 5 प्रतिशत से अधिक डीसीपी है। बरसीमए लुर्सन। चारा को आगे दो प्रमुख समूहों में वर्गीकृत किया जाता है जैसेरू
1- हरा चारा ध् रसीला हरा चाराः इनमें लगभग 60.90 प्रतिशत नमी होती है। चरागाहए खेती किए गए फ़ोडए पेड़ के पत्तेए जड़ की फसलें और साइलेज।
2- सूखा चारा इनमें लगभग 10.15 प्रतिशत नमी होती है जैसे। भूसाए हे ;सूखी घासद्ध और कडबी।

खद्ध दाना
ये फीडस्टफ हैं जिनमें 18 प्रतिशत से कम कच्चा फाइबर और 60 प्रतिशत से अधिक टीडीएन है। वे कम भारी होते हैं और उनकी पाचनशक्ति अधिक होती है। वे पोषक तत्वों के अच्छे स्रोत हैं और इसलिएए उनके पास चारा की तुलना में अधिक पोषक मूल्य है। कॉन्सेंट्रेट को आगे वर्गीकृत किया गया हैरू
1- एनर्जी रिच कॉन्सेंट्रेट दृ उदाहरण. अनाजए अनाज उपोत्पादए जड़ें और कंद।
2- प्रोटीन रिच कॉन्सेंट्रेट . पद्ध पौधों से प्राप्तरू तिलहनी केकए दाल चूनीए ब्रेवर के अनाज और खमीर।
पपद्ध पशु स्रोतरू मछली का चूराए मांस का चूराए खून का चूरा।
गद्ध पूरक आहार फ़ीड की खुराक बेसल फ़ीड के पोषण मूल्य में सुधार करने के लिए उपयोग किए जाने वाले यौगिक हैं ताकि किसी भी कमी का ध्यान रखा जा सके। आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले फीड सप्लीमेंट्स
1- विटामिन सप्लीमेंट्स जैसे हैं। रोविमिक्सए विटबेलेंडए अरोविट आदि।
2- खनिज सप्लीमेंट्स उदा। मिनीमिक्सए मिल्क मिनए न्यूट्रीमिल्कए अरोमिन आदि।
घद्ध फीड योगज फीड एडिटिव्स गैर.पोषक पदार्थ हैं जिन्हें आमतौर बेसल फ़ीड में मिलाया जाता है ताकि पशुओं की फीड दक्षता और उत्पादक प्रदर्शन में सुधार हो सके। कुछ आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले फीड एडिटिव्स नीचे दिए गए हैंरू 1द्ध एंटीबायोटिक्स उदा। टेरामाइसिनए जिंक बैक्टिरसिनए फ्लेवोमाइसिन आदि 2द्ध एंजाइमों उदा। एमाइलेजए लाइपेजए प्रोटीजए पेप्सिन आदि 3- हॉर्मोन्स उदा। एस्ट्रोजेनए प्रोजेस्टेरोनए हेक्सोस्टेरोल आदि 4द्ध थायरोप्रोटिन उदा। आयोडीन युक्त कैसिइन। 5द्ध प्रोबायोटिक्स उदा। माइक्रोबियल प्रजातियां। लैक्टोबैसिलस। 6द्ध बायोस्टिमुलेटर्स उदा। जीवित अंगों जैसे कि तिल्लीए यकृतए अंडाशयए चिक भ्रूण आदि के अर्कद्ध 7 एंटीऑक्सिडेंट उदा। विटामिन ई ;टोकोफेरोल्सद्धए बीएचटी ;ब्यूटाइल हाइड्रॉक्सी टोल्यूनिद्ध। 8 मोल्ड अवरोधक उदा। प्रोपियोनिक एसिडए एसिटिक एसिड। 9द्ध पेलेट ईण्ग गुरए भोजनए गुड़ए सोडियम बेंटोनाइट बाँधता है।
आहारध्खाद्य पदार्थ
संतुलित पशु आहार
संतुलित आहार उस खाद्य मिश्रण को कहते हैं जो पशुओं के शरीर को बनाये रखने के लिए तथा उनकी उचित बढ़ोतरी व दूध उत्पादन के लिए कई तरह के खाद्य पदार्थों द्वारा बनाया जाता हैए जिसे 24 घंटों में एक पशु को खिलाया जाता है। इसमें सभी आवश्यक पोषक तत्त्व जैसे उर्जाए प्रोटीनए खनिजए विटामिन आदि उचित मात्रा और सही अनुपात में प्राप्त होते हैं। किसी भी एक खाद्य पदार्थ से सारे पोषक तत्त्व तो मिल जायेंगें परन्तु उसकी मात्रा और अनुपात शरीर की जरूरत के मुताबिक नहीं होगा। इसलिए पशुओं के संतुलित आहार में विभिन्न प्रकार के हरे चारेए कई प्रकार के अनाजए खलए इत्यादि उत्पाद को मिलाकर बनाया हुआ दाना मिश्रण तथा सूखे चारे के प्रयोग में लाये जाते हैं।
संतुलित पशु आहार कैसा होना चाहिए .
– संतुलित आहार रूचिकर होना चाहिए।
– पेट भरने की क्षमता रखता हो।
– सस्ताए गुणकारीए उत्पादक तथा बदबू और फफूद रहित होना चाहिए।
– वह अफारा ना करता होए दस्तावार भी न हो और उस आहार में हरे चारे का समावेश हो।
संतुलित पशु आहार न केवल पशु की जरूरतों को पूरा करता हैए बल्कि यह दुग्ध उत्पादन की लागत को भी कम करता है। दूध देने वाले पशुओं को पोषण कि जरूरत तीन कारकों के लिए होती हैरू
1- शरीर की यथा स्थिति को बनाये रखने के लिए
2- दुग्ध उत्पादन की आवश्यकता को पूरी करने के लिए
3- गर्भावस्था के लिए
अतः पशु का आहार इन तीन जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाना चाहिएए जिससे पशु स्वस्थ्य रहेए अधिक उत्पादन दे तथा अगली पीढ़ी के लिए स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दे।
विभिन्न संस्थानों में किए गये अनुसंधानों के अनुसार पशुओं को संतुलित आहार खिलाने से पशु उत्पादन क्षमता में 30.35ः तक की वृद्धि होती है।
थम्ब नियम
1- गाय के 2ण्5 किलोग्राम दुग्ध उत्पादन पर 1 किग्राए दाना
2- भैसों के 2 किलोग्राम दुग्ध उत्पादन पर 1 किग्राए दाना।
संतुलित आहार कैसे बनाया जाता है
परिस्थितियों के अनुसार आप अपने पशुओं के लिए संतुलित आहार बनायें। जिन किसान भाईयो के पास हरा चारा उगाने के लिए जमीन और सिंचाई का साधन हो वे अपने पशुओं के लिए हरा चारा पूरे वर्ष उगायें। अच्छे गुण वाला हरा चारा पूरा वर्ष पशुओं को भर पेट खिलाया जाये तो दूध उत्पादन का खर्च बहुत कम हो जाता है तथा सभी आवश्यक पोषक तत्त्व प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो जाते हैं।
हरे चारे
जैसा कि आप जानते हैं चारे वाली फसलें दो तरह की होती हैं।
पद्ध एक दाल फलीदार वालीरू. जैसे कृ मक्काए मकचरीए ज्वारए बाजराए जई आदि। एक दाल वाली चारे में कृ उर्जा की मात्रा अधिक होती है।
पपद्ध दो दाल वाले चारेरू. जैसे कृ बरसीमए लुर्सनए लोबियाए ग्वार आदि। दो दाल वाले चारे में. प्रोटीनए विटामिन और खनिज की मात्रा अधिक होती है।
यदि इन दोनों चारों को मिलाकर पशुओं को खिलाया जाये तो सभी तरह के पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में मिल जायेंगे। इस तरह के मिश्रित चारा उगाने के लिए आप एक कतार दो दाल वाले चारे और दो कतार एक दाल वाले चारे की बुआई करें। ऐसा करने से प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और उर्जा युक्त हरा चारा मिलेगा।
पूरे साल हरा चारा मिलता रहे इसके लिए क्या करेंघ्
इसके लिए आप गर्मियों में दो कतार बाजरा और एक कतार लोबिया की बुआई करें। उसके बाद बरसात के मौसम में दो कतार मक्का और एक कतार लोबिया की बुआई करें और सर्दियों में बरसीम के साथ सरसों की बुआई करें। इससे आप सर्दियों में 5 कटाई ले सकते हैं और इस तरह से पूरे साल आप को हरा चारा मिलता रहेगा।
जरूरत से ज्यादा चारा उपजे तो उसका क्या करेंघ्
नवम्बर.दिसम्बर आरै मई.जून के महीनों में चारे की कमी रहती हैं। जबकि अगस्त.सितम्बर आरै मार्च.अप्रलै में हरे चारे की उपज जरूरत से ज्यादा हो सकती हैं। जिनको कमी के महीनों के लिए सुखाकर हे बनाकर या साइलेजय आचार की तरह बना कर रख लें। हे बनाने के लिए बरसीमए लुर्सन या जई का चारा ले आरै साइलेज के लिए मक्काए ज्वारए जई आदि को इस्तेमाल करें।
पशुओं का आहार व दाना मिश्रण तैयार करते समय निम्न बातों को ध्यान में रखते हैं
1ण् सबसे पहले पशु की अवस्था के आधार पर शुष्क पदार्थए प्रोटीन व कुल पाच्य तत्वों का निर्धारण करें।
2ण् उसके बाद शुष्क पदार्थ के आधार पर विभिन्न आहारिक पदार्थ जैसे दानाए हरा चाराए सुखा चाराए आदि की मात्रा निर्धारित करें।
3ण् जो मात्रा शुष्क पदार्थ के आधार पर आये उससे यह देखें कि प्रोटीनए कुल पाच्य पदार्थ कितने मिल रहे हैं।
4ण् आहारों में तत्वों की मात्रा व पशु की जुल आवश्कता देखकर निर्धारत करें।
5ण् अगर किसी तत्व की मात्रा कम हो तो उसकी पूरी करने के लिए सबसे सस्ते आहार का इस्तेमाल करे यदि किसी तत्व की मात्रा ज्यादा हो तो उसे सबसे महंगे आहार की मात्रा कम करें।
गाय एवं भैसों के पाचन तंत्र के सामान्य रूप से काम करने के लिए चारे की न्यूनतम मात्रा आवश्यक है। हमारे देश में चारे की अधिक मात्रा खिलानी चाहिए जिससे राबितए दाना मिश्रणद्ध की कम मात्रा खिलानी पड़े। उत्तम चारे जैसे बरसीमए लुर्सनए मक्का आदि भरपेट देने से दाना मिश्रण की मात्रा कम की जा सकती है। कल बरसीम या उसके साथ 1.2 किलो भूसा खिलाने से 8.10 लीटर दूध का उत्पादन प्रतिदिन ले सकते हैं।
दाना मिश्रण कैसे बनाते हैघ्
अच्छा पशु दाना सस्ते तथा साफ चीजों को मिलाकर बनाया जाता है। उदाहरण के लिए मूगफली या तीलध्बिनौला या सरसों या अलसी का खलए मोटे अनाजए चोकरए चुन्नीए भूसी तथा खनिज मिश्रण व सादा नमक लेकर दाना बना लें। दाना मिश्रण बनाते समय यह ध्यान रखें कि तैयार दाना मिश्रण में प्रोटीन 14.16ः तथा कुल पाच्य तत्व कम से कम 65.68ः हो अतः निम्न अनुपात में ही दाना मिश्रण बनाएं।


खनिज मिश्रण का महत्व
– बछड़ेध्बछियों की वृद्धि में सहायक है।
– पशु द्वारा खाए गए आहार को सुपाच्य बनाता है।
– दुधारू पशु के दूध उत्पादन में वृद्धि करता है।
– पशु प्रजनन शक्ति को ठीक करता है।
– पशुओं को ब्यानाए के आस दृ पास होने वाले रोगों जैसे दुग्धज्वरए किटोसिसए मूत्र में रक्त आता आदि का रोकथाम करता है।