पशुपालन से मै किस तरह रोजगार प्राप्त कर सकता हूँ, तथा मेरी आमदनी कितनी होगी??

प्रस्तावना:

भारत एक तरफ जहां खेती के लिए पूरी दुनियां में मशहूर है वहीं दूसरी तरफ पशुपालन भी इसका भिन्न अंग रहा है. देश के किसानों के लिए खेती जीतना महत्वपूर्ण है उतना ही महत्वपूर्ण पशुपालन भी है. पशुओं की अगर बात करें तो किसान इनके प्रति दयाभाव रखते हैं इसके अलावा किसानों के लिए यह मुनाफा देने वाला व्यव्साय भी है. पशुपालन किसानों के लिए एक लाभदायक व्यवसाय के तौर पर भी देखा जाता है। पशुपालन के जरिए कई किसान व आम लोग कई तरह के उत्पादन करके लाखों रुपए महीना कमा रहे हैं. किसानों के लिए पशुपालन एक ऐसा व्यवसाय माना जाता है जिसमें घाटा होने की संभावना कम होती है। पशुपालन पुराने समय से ही किसानों के बीच का काफि प्रचलित रहै है और वहीं आज यह पूर्ण रुप से विकसित हो रहा है. पशुपालन में भी आज कई नई वैज्ञानिक पद्धतियां विकसित हो गई हैं जो किसानों के लिए काफि लाभदायक हो रहा है।

आज हम आपको कुछ ऐसे पशुओं के बारे में जानकारी देंगे जिनको किसान व्यवसाय बनाकर लाखों रुपए कमा सकते हैं। पशुपालन व्यवसाय तो वैसे कई पशुओं के जरिए किया जा सकता है लेकिन जो पांच प्रमुख पशुओं के जरिए पशुपालन में लाभ कमाया जा सकता है वो है गाय-भैंस, बकरी, मछली, मुर्गी एवं सूकर पालन।

गाय –भैंस पालन/ डेरी व्यवसाय: 

गाय एवं भैंस पालन का व्यवसाय पिछले कुछ दिनों में काफि विकसित हुआ है. गाय पालन का व्यवसाय अब सिर्फ गांव तक ही सिमित नहीं है बल्कि शहरों में इसका चलन जोरों पर है। बड़े-बड़े फॉर्म खोलकर गाय एवं भैंस पालन करके डेयरी प्रोडक्ट्स का उत्पादन किया जा रहा है. यह  बहुत ही लाभकारी व्यवसाय क्योकि इसमें दुध और गोबर दोनों के द्वारा मुनाफा कमाया जा सकता है। इस  व्यवसाय की शुरुआत मात्र 4 से 5 पशुओं  से की जा सकती है. डैनी पशु के दूध की बात करें तो एक पशु आम तौर पर 30 से 35 लीटर दूध देती है और एक लीटर दूध की कीमत है 40 रुपए, इसके हिसाब से दिन का लगभग 1200 रुपए. यानि 5 डेरी पशुओं से  केवल  दूध से आप 6 हजार तक कमा सकते हैं। उसमें से आपके चारा खर्च आदि निकालना होगा तो आप ये मान लिजिए दिन के 2 हजार रुपये कम से कम 5 डेरी पशुओं पर तो आप कमा ही सकते हैं।

इसके अलावा दूध से बनने वाले उत्पाद दूध, दही, छाछ, घी, और मावा के जरिए भी मुनाफा कमाया जा सकता है. इसके अलावा गोबर से गैस, कंडे और खाद बनाकर भी मुनाफा कमाया जा सकता है।

मछली पालन का व्यवसाय:

मछली पालन के लिए इन दिनों सरकार द्वारा भी काफि मदद की जा रही है. मछली पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसमें लागत कम और मुनाफा ज्यादा है. मछली पालन के लिए इन दिनों जगह-जगह कृत्रिम रूप से तालाब या टंकी आदि बनाकर मछलियों का पालन किया जा रहा है। मछलियों का सेवन करने वाले लोगों की संख्या प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. लोग इसका सेवन प्रेटीन औऱ इसके तेल के लिए करते हैं। एक मछली एक किलो की होने के बाद आप सौ रुपये किलो के हिसाब से बेचते हैं तो आप 5 हजार मछलियों के हिसाब से महीने के 40 से 50 हजार रुपये तक कमा सकते हैं. अगर आप मछली पालन को व्यवसाय बनाने के लिए सोच रहे हैं तो शुरुआत कर सकते हैं।

बकरी पालन का व्यवसाय:

बकरी पालन की अगर बात करें तो यह गाय पालन से काफि अलग है और यह गांव तक ही सीमित है। बकरी को गरीब की गाय भी कहा जाता हैं। बकरी पालन से भी अच्छा लाभ कमाया जा सकता है। यह है बकरी पालन की प्रक्रिया 5 बकरियां पालके भी इस व्यवसाय को शुरू कीया जा सकता है. बकरी 6 माह में दो बछड़े देती है यदि बाजार में एक बछड़े को चार हजार में भी बेचते हैं तो दो बछड़े के 8 से 9 हजार रुपये तक कमाया जा सकता है. यानि एक बकरी से सालाना 18 से 20 हजार और 5 बकरियों से कुल एक लाख रुपये तक कमा सकते हैं। बकरी पालन के लिए सरकार लोन भी देती है तो इसे आप आसानी से शुरु कर सकते हैं।

मुर्गीपालन का व्यवसाय:

मुर्गीपालन भी एक अच्छे व्यवसाय के तौर पर देश में फल-फूल रहा है. देश में मुर्गीपालन करने वालों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है. हर तरफ पॉल्ट्री फॉर्म खोले जा रहे हैं. मुर्गीपालन में अंडे और मास के जरिए व्यवसाय करके लाभ कमाया सकता है. प्रोटीन के कारण अंडे और मास का व्यवसाय ज्यादा हो चुकी है. मुर्गी पालन की अगर बात करें तो लगभग दस हजार तक मुर्गियों के पालन से लगभग महीने का 60 हजार रुपए तक कमाया जा सकता है. आने वाले वक्त में इस व्यवसाय की मांग और बढ़ रही है।

बता दें की सरकार इन सभी तरह के व्यवसाय के लिए सब्सिडी देती है जिसके द्वारा इन व्यवसायों को शुरु करना काफि आसान हो जाता है. सब्सिडी के बारे में अधिक जानकारी के पाने के लिए आप हमे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके पूछ सकते हैं।

सुअर पालन:

व्यावसायिक तौर पर सुअर पालन एक बहुत ही फायदेमंद बिज़नेस है। कुछ समय पहले तक भारत में लोग सुअर पालन को बड़ी हेय देखते थे लेकिन आज जब भारत में दिन व दिन लोग प्रोफेशनल होते जा रहे हैं तो उनका व्यवसायों की ओर देखने का नजरिया भी बदल गया है। अब लोग सुअर पालन के व्यवसाय को एक बहुत ही फायदे वाला समझते हैं।

सुअर पालन के फायदे:

  • सुअर कि प्रजनन क्षमता बहुत ज्यादा होती है एक साल में एक मादा सुअर दो बार बच्चे देती
  • है और एक बार में 8 – 12 बच्चे देती है ।
  • एक माता 8-9 महीने में बच्चे देना शुरू कर देती है।
  • इस व्यवसाय को शुरू करने में खर्चा बहुत कम है।
  • मीट के शर्रीर से खाने वाले मीट का रेश्यो सबसे ज्यादा होता है . एक सुअर से करीब 80 % खाने
  • योज्य मीट मिलता है।
  • सुअरों में मीट कन्वर्शन रेश्यो बहुत जायदा होता है इन पाचन तंत्र किसी भी  प्रकार के न खाने योग्य पदार्थों को मीट में कन्वर्ट कर देते हैं।
  • सुअर लगभग हर प्रकार का खाना खा लेते हैं।  
  • सुअर का मांस बहुत बहुत पौष्टिक और ऊर्जादायक होता है।
  • एक सूअर 7-9 महीने में मांस के लिए तैयार हो जाता है इस उम्र में इसका वजन 70-100 किलो हो जाता है ।

एक मोठे गणित के हिसाब से एक सुअर की कीमत रु. 8000/ । अगर एक नर व एक मादा के साथ सुअर पालन शुरू किया जाय तो खर्चा रु 16000/- सुअर एक साल में 2 से 3 बार बच्चे देते हैं और एक बार में होने वाले बच्चों की संख्या  8-12 होती है। अर्थात एक जोड़े से आपको एक साल में 20-30  सुअर मिल जाते हैं जिनकी कीमत रु. 1,60,000/- से 2,40,000/- तक होती है।  अगर इसका 50 % भी इनपर खर्चा आया तो रु. 80,000/- से 1,60,000/- तक शुद्ध  लाभ है।

उपसंहार: 

छोटे, भूमिहीन तथा सीमान्त किसान जिनके पास फसल उगाने एवं बड़े पशु पालने के अवसर सीमित है, छोटे पशुओं जैसे भेड़-बकरियाँ, सूकर एवं मुर्गीपालन रोजी-रोटी का साधन व गरीबी से निपटने का आधार है। विश्व में हमारा स्थान बकरियों की संख्या में दूसरा, भेड़ों की संख्या में तीसरा एवं कुक्कुट संख्या में सातवाँ है। कम खर्चे में, कम स्थान एवं कम मेहनत से ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए छोटे पशुओं का अहम योगदान है। अगर इनसे सम्बंधित उपलब्ध नवीनतम तकनीकियों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाय तो निःसंदेह ये छोटे पशु गरीबों के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है।

बता दे कि पशुधन में विभिन्न प्रकार की विशेषताएं होती हैं जो उन्हें स्थायी ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। वे विपणन योग्य उत्पाद प्रदान करते हैं जो छोटे पैमाने पर, घरेलू उत्पादन प्रणालियों द्वारा उत्पादित किए जा सकते हैं, और आम तौर पर कई फसलों की तुलना में उच्च मूल्य देते है और फसल की तुलना में सुरक्षित होते हैं। अपेक्षाकृत उच्च आय के साथ एक कृषि उत्पाद के रूप में, ग्रामीण परिवारों को शहरी-आधारित आर्थिक विकास में भाग लेने के लिए एक साधन के रूप में पशुधन विशेष रूप से आकर्षक हैं। पशुधन को प्रत्यक्ष रूप से भविष्य के निवेश के लिए धन के भंडार के रूप में देखा जा सकता है पशु से मिला गोबर कृषि उत्पादन में योगदान देता हैं. अंत में, वे मिट्टी की उर्वरता और कृषि अपशिष्ट के पुनर्चक्रण में योगदान कर सकते हैं। पशुधन उत्पादों की बढ़ती बाजार मांग से कई पशुपालक सीधे लाभान्वित हो सकते हैं।

किसान बंधू कई तरह के पशुओं का पालन करके पशुपालन व्यवसाय कर सकते हैं.जैसे गायपालन, भैंस पालन, बकरी पालन, भेंड पालन, कुक्कुट पालन, सूकर पालन, इत्यादि। हम इस पोर्टल के माध्यम से आपको पशुपाल से सम्बंधित कुछ जानकारी दे रहे हैं . जिसकी सहायत से आप पशुपल्म का व्यवसाय प्रारभ कर सकते हैं।