बकरियों की आहारचर्या: 

बकरी एक ऐसा पशु है जो खराब से खराब और कम से कम चारे पर अपना निर्वाह कर लेती है। बकरी हरी घास, कँटीली झाड़ी तथा पेड़ पौधों की पत्तियों से अपना निर्वाह कर लेती है। यह चरना खूब पसन्द करती है। कँटीली झाड़ियाँ, बबूल, पीपल, नीम और बेर आदि की पत्तियों को बकरियाँ खूब खाती है। अतः इनको चरने के लिए बाहर भेजना परम आवश्यक है। लेकिन बकरियाँ चरागाह बदलना बहुत पंसद करती है।

बकरियों को प्रतिदिन एक ही चरागाह में भेजने पर वे शीघ्र ही बीमार पड़ जाती है। ओंस में भीगी घास चराए जाने पर वे बकरियों को मुंह की बीमारी हो जाती है। वृक्षों की शाखाओं के अंकुर चबा जाने और अनेक प्रकार के पौधों और वृक्षों को अपना आहार बना लेने की बकरी की आदत के कारण उसे पेड़-पौधों का शत्रु समझा जाता है लेकिन इसके लिए इस निर्दोष पशु को दोषी नहीं समझना चाहिए। इसके लिए तो बकरियाँ पालने वाले वे गडरिएं उत्तरदायी हैं। जो अपनी गरीबी के कारण् इन बकरियों को झुण्डों में खुला छोड़ देते हैं।

यदि हमें अपनी वनस्पति की रक्षा करती है तो बकरियों के पालन की वर्तमान विधियों में सुधार लाना आवश्यक है। शीत ऋतु में रातें लम्बी होती है अतः दिन की चराई इनके लिए पर्याप्त नहीं होती। इन दिनों के लिए बकरियों को हरा चारा दिए जाने की व्यवस्था की जानी चाहिए। प्रति बकरी 2 कि.ग्रा. हरा चारा रात्रि के लिए पर्याप्त होता है। चारे को बाँधकर लटका देना चाहिए अथवा पैरों द्वारा बकरियाँ उसे खराब कर देती हैं। बकरियों को भीगा चारा कदापि नहीं देना चाहिए।

बकरियों की भोजन संबंधी मुख्य बातें:-

1- बकरियों को अगर चरागाह में नहीं भेजा जाता तो उन्हें तीन बार-सुबह, दोपहर व शाम को चारा देना चाहिए।

2- बकरियों के चारे की मात्रा निश्चित नहीं है परन्तु उन्हें इतना भोजन अवश्य मिलना चाहिए जितना कि एक बार में उस भोजन को समाप्त कर लें।

3- एक औसत दुधारू बकरी को दिन में करीब 3.5-5.0 कि.ग्रा. चारा मिलना चाहिए। इस चारे में कम से कम 1.0 कि.ग्रा. सूखा चारा (अरहर, चना या मटर की सूखी पत्तियाँ या अन्य कोई दलहनी घास) मिलना चाहिए।

बकरियों के भोजन की मात्रा निश्चित करने में निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए।

अ) एक वयस्क बकरी को 50 कि.ग्रा. भार के पीछे 500 ग्राम राशन।

ब) दुधारू बकरी के प्रति 3 कि.ग्रा. दुध उत्पादन पर 1 किग्रा. राशन।

स) नौ से 12 माह तक की आयु के बच्चों को 250-500 ग्राम राशन प्रतिदिन।

द) प्रसव से दो माह पहले गर्भकाल का राशन 500 ग्राम प्रतिदिन।

य) बकरे को साधारण दिनों में 350 ग्राम राशन प्रतिदिन व प्रजनन काल में 500 ग्राम राशन प्रतिदिन।

र) दूध से सूखी बकरी को सुबह शाम में 400 ग्राम राशन प्रतिदिन देना चाहिए।

बकरियों के लिए उपयुक्त रातब:

स्र्टाटरराशन: 15 दिवस से बड़े बच्चों को स्र्टाटरराशन जो कि आसानी से बच्चों को पच सके।

मक्का: 20 प्रतिशत

चना: 20 प्रतिशत

मूंगफली की खाली: 35 प्रतिशत

गेहूँ की चूरी: 22 प्रतिशत

खनिज मिश्रण: 2.5 प्रतिशत

साधारण नमक: 0.5 प्रतिशत

इस राशन में पचनीयक्रूड प्रोटीन 18-20 प्रतिशत कुल पाच्य तत्व 72 प्रतिशत एवं ऊर्जा 2.5-2.9 मेगाकैलोरी/किग्रा. बच्चों को 4 से 8 किग्रा. भार पर 50-250 ग्राम दाने का मिश्रण एवं 9-20 किग्रा. पर 350 ग्राम दाना मिश्रण प्रतिदिन देते हैं। 

ग्रोवर राशन: तीन माह से बड़े बच्चों को दलहनी चारा सामान्य बढ़वार के लिए देना चाहिए। कम गुणवत्ता वाले चारे में 12-14 प्रतिशत पचनीय क्रूडप्रोटीन एवं कुल पाच्य तत्व 63-65 प्रतिशत 350-400 ग्राम प्रतिदिन मिलाकर देना चाहिए। आधिक खिलाई पिलाई को रोकना चाहिए। ग्रोइंग किड्स को निम्न दाने का मिश्रण देना चाहिए।

मक्का: 20 प्रतिशत

चना: 32 प्रतिशत

मूंगफली की खाली: 30 प्रतिशत

गेहूँ की चूरी: 15 प्रतिशत

खनिज मिश्रण: 2.5 प्रतिशत

साधारण नमक: 0.5 प्रतिशत

फिनिशर राशन: काबोहाइड्रेट ऊर्जा वाले खाद्य फैटी कारकस के लिए देना चाहिए। इस दाने मिश्रण में 6-8 पचनीय क्रूड प्रोटीन एवं 60-65 कुल पाच्य पोषक तत्व होने चाहिए।

बड़ी बकरियों के लिए दाने की मात्रा:

जीवन निर्वाह राशन – 250 ग्राम प्रति 50 किग्रा. भार

उत्पादन राशन – 450 ग्राम प्रति 2.5 ली. दूध/मादा (डो)

गर्भवती राशन – अंतिम दो माह गर्भकाल में 220 ग्राम/दिन

बक राशन – 400-500 ग्राम राशन प्रतिदिन

बकरियों के प्रमुख चारे:

पेड़ों की पत्तियाँ-गूलर, पाकर, पीपल, नीम, आम, अशोक, बनयान, मलबेरी।

झाड़ियाँ-बेर, झरबरी, करौंदा, गोखरू, हिबिस्कस।

घासे- दूब, मोथा, अंजन, सेंजी, हिरनखुरी आदि।

कृषित चारे- लूरार्न, बरसीम, लोबिया, सरसों, जई, मक्का, जौ। 

गर्भवती बकरियों का आहार: गर्भवती बकरियों को अंतिम 6-7 सप्ताह अच्छा आहार देना जरूरी है। इनको हरी पत्तियों के अलावा 400-500 दाना चाहिए। इसके साथ कैल्शियम, फास्फोरस, नमक के मिश्रण चाटने के लिए रखने चाहिए। बकरी की प्रसूति के 4-5 दिन पहले 50 प्रतिशत दाना कम करके 10 किलो चोकर के साथ लूरार्न/बरसीम घास 1 किग्रा., हराचारा 1 किग्रा., दाना मिश्रण 0.5 किग्रा. और सूखा चारा 1 किग्रा. खाद्य देना चाहिए।

बकरियों के लिए खनिज मिश्रण का संगठन:-

हड्डी का चूरा – 42 प्रतिशत

लाइम चूना/चाक      – 30 प्रतिशत

साधारण नमक       – 20 प्रतिशत

सल्फर – 5 प्रतिशत

फोरस सल्फेट – 3 प्रतिशत

दाने के मिश्रण में मिलाने की दर- 2 प्रतिशत

बकरियों को पानी की आवश्यकता: बकरी को कच्छ पानी की आवश्यकता होती है। गंदा बरसात का पानी बकरी नहीं पीती है। एक दिन में 6-8 लीटर तक पानी पीती है। वातावरण के होने वाले बदलाव पर बकरी की प्यास अबलंबन रहती है। धूप के गर्भ मौसम में ज्यादा एवं ठंड़े मौसम में कम पानी लगता है। कम पानी पीने से उत्पादन में भी कमी आती होती है।

बकरियों का निवास: बकरियों के लिए किसी बाड़े की आवश्यकता नहीं होती। साधारण स्थान में वह बात का ध्यान रखना चाहिए कि वह सूखा, नमीरहित, हवादार, स्वच्छ व खुला हुआ हो, जंगली पशुओं से सुरक्षित हो और गर्मी, वर्षा व शीत तीनों ऋतुओं से बचाव हो सके। प्रत्येक बकरी के लिए लगभग एक वर्ग मीटर जगह पर्याप्त होती है। यदि बकरियाँ कम हो तो इन्हें एक ही पंक्ति में बांधना चाहिए अधिक संख्या होने पर दोहरी पंक्ति में बाँधा जा सकता है। बकरियों के लिए चरही की ऊंचाई 15 सेंमी. और चैड़ाई 40 सेंमी. पर्याप्त होती है। बाड़े का फर्श भूमि से 15 सेंमी. ऊँचा हो और चरही से नाली तक 8 सेंमी. का ढ़ाल हो। जिससे की सारा मूत्र बहकर नाली में चला जाए। फर्श साफ व सूखा होना चाहिए। हवा और बौछारों को रोकने के लिए एक दीवार का होना आवश्यक है।

दो बकरियों के लिए 3 मी. लम्बा व 1.5 मी. चैड़ा बाड़ा पर्याप्त होता है। नर पशु 2.5 ग 2.0 मीटर के बाड़े में अकेले रखी जानी चाहिए। खुला बाड़ा जिसका आकार 12 मी. ग 18 मी. हो 100 बकरियों को रखा जा सकता है।

बकरों का बाड़ा बकरियों के बाड़े से कम से कम 16 मी. की दूरी पर होना चाहिए। उनका निवास स्थान तो बकरियों जैसा ही हो, लेकिन इसमें बकरों के व्यायाम का समुचित प्रबन्ध होना चाहिए।