भारतीय बारबरी बकरी


उत्पत्ति – उत्तरप्रदेष के इटावा, आगरा, मथुरा। और अलीगढ़ जिले और राजस्थान का भरतपुर जिला। बौनी दोहरी उद्देश्य की नस्ल। स्थितियों के लिए बेहद उपयुक्त है और इसलिए आमतौर पर शहरों में पाई जाती हैं।
विशेषताएं /विशिष्ट लक्षण
शरीर – छोटे आकार का और सुडोल, सतर्क और आकर्षक।
आंखें – उभरी हुई।
कान – छोटे, खड़े और गोल पाईप के समान।
सींग – छोटे मुडे़ हुये, लंबाई में मध्यम ऊपर और पीछे की ओर उठे हुये ।
थन – शंकुधारी थनों के साथ ।
नर में एक बड़ी मोटी दाढ़ी पाई जाती है।
शरीर का रंग – व्यापक विविधता। लेकिन छोटे हल्के भूरे रंग के धब्बे के साथ सफेद बहुतायत।
बहुत अधिक संख्या में बच्चे पैदा करने वाली और आमतौर पर जुड़वां अथवा तीन बच्चों को जन्म देती है, और शीघ्र परिपक्व साथ इन्हें शहरी क्षेत्रों में भी आसानी से लालन-पालन किया जा सकता है। इन बकरियों की आम विशेषता हैं।
शारीरिक वजन – 40-50 किलो बकरा और 35-40 किलो बकरी ।
दुग्ध उत्पादन क्षमता – औसत दुग्ध उत्पादन प्रति ब्यात 200-370 किलोग्राम। औसत दुग्ध उत्पादन प्रतिदिन – 0.7 से 1.3 किलोग्राम।