ब्रायलर में टीकाकरण एंव सावधनियाॅं –


मुर्गियों में टीकाकरण का बहुत महत्वपूर्ण योगदान है। विषाणुओं द्वारा फैलने वाील बीमारीया जैसे कि रानीखेत बीमारी,मैरेक्स बीमारी,मुर्गियों कि चेचक तथा गम्बोरो बीमारीयों में इसका महत्व बहुत अधिक है। यह बहुत जरुरी है कि किसान मुग्यिों की इन बीमारीयों में टीकाकरण के उपयुक्त समय,विधि,मात्रा तथा खुराक के बारें में जाने मथा उसका सही से उपयोग करे जिसका इन बीमारीयों से उनकी मुर्गियों का सही रुप से पूर्णतया बचाव हीे सके ।


मुर्गियों में इन खतरनाक बीमारीयों से बचाव के लिए टीकाकरण करने के लिए निम्नलिखित सावधानियाॅ बरतनी चाहिए:-
टीकाकरण का उपयुक्त समय, विधि तथा खुराक के बारे में पशु चिकित्सा अधिकारी से जानकारी लेना चाहिए।

  • टीके के बारे में सही जानकारीयाॅं जैसे उनका स्रोत,बैच नं0 व नाम आदि नोट करना चाहिये।
  • टीका और उनका घोल बनाने में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ को रेफ्रीजरेटर में रखना चाहिये।
  • रेफ्रीजरेटर न होने की स्थिति में टीके को फ्लास्क में बर्फ डालकर रखा जा सकता है।
  • टीके को निर्माता कम्पनी के निर्देशानुसार प्रयोग करना चाहिए।
  • टीेकरण बीमार मुर्गियों में नहीं करना चाहिए।
  • टीकाकरण करने पर कुछ प्रतिक्रिया या तनाव हो सकता है। इससे बचने के लिए टीकाकरण के तीन दिन पहले तथा तीन दिन बाद मल्टीविटामिन का घोल पिलाना चाहिये।
  • टीके के घोल को 1-2 घंटे के अंदर इस्तमाल कर लेना चाहिए।
  • टीकाकरण के साथ मुर्गियों को एन्टीबायोटिक्स नहीं देनी चाहिए।

ब्रायलर हेतु टीकाकरण कार्यक्रम
0 दिन भ्टज् 0.2 ैध्ब् गले में मरेक्स बीमारी
5-7 दिन थ्ण्1 या लासोटा एक बूँद नाक या आँख में रानीखेत बीमारी
14 दिन स्नामतज वत ळमवतहपं ेजतंपद एक बूँद नाक या आँख मे गुम्बोरो बीमारी

प्रकाश व्यवस्था – रोशनी के लिये बिजली प्वाइंट जमीन की सतह से 7-8 फीट की ऊँचाई पर बनवाना चाहिए। इनके बीच की दूरी 10 फीट होनी चाहिए। फर्श के प्रत्येक 100 वर्ग फीट जगह में एक बिजली प्वाइंट के लिए 60 वाट का बल्ब आवश्यक है। मुर्गी घर में बल्ब इस तरह लगायें कि प्रति मुर्गी एक वाट की दर से प्रकाश उपलब्ध हो। सफेद प्रकाश मुर्गी घर के लिये उपयुक्त है और लाल रंग के प्रकाश का उपयोग केनाबाल्जिम को रोकने में किया जाता है।
ब्रायलर को फर्श से 3.5 फुट केंडल का 23 घंटे का प्रकाश तथा 1 घंटे का अंधकार उपलब्ध कराना चाहिए। 3.5 वाट का एक बल्ब ब्रूडिंग, पहले दो दिन के लिए 4ेु मिमज स्थान के लिए होना चाहिए। फिर 4ेु मिमज क्षेत्रफल के लिये 1विवज केंडल तक प्रकाश धीरे-धीरे कम किया जा सकता है।

तापक्रम व्यवस्था – मुर्गीघर में निम्नानुसार होनी चाहिए।
0-5 दिन 35 डिग्री सेल्सियस
5-7 दिन 32 डिग्री सेल्सियस
7-14 दिन 29 डिग्री सेल्सियस
14-21 दिन 26 डिग्री सेल्सियस
21 दिन और अधिक 18-24 डिग्री सेल्सियस

ब्रूडिंग इकाई – इससे छोटे चूजों को गर्मी प्रदान की जाती है।

होवर – यह सबसे अधिक प्रयोग किया जाने वाला ब्रूडर है। यह गर्मी उत्पन्न करने वाली इकाई धातु के गोल या एंगुलर टुकड़े से ढका होता है, जो फर्श की ओर गर्मी फेंकता है। इसमें ऊष्मा प्रदान करने के लिए गैस, इन्फ्रारेड बल्ब, मिट्टी का तेल या विद्युत का उपयोग किया जाता है।
यदि चूजे हावर के नीचे समान रूप से वितरित हो तो तापमान सही समझना चाहिए। जब तक चूजोें के पंख पूरी तरह नहीं निकल आयें, बाह्य ऊष्मा स्रोत न हटायें।

ब्रूडर गार्ड – इसका उपयोग चूजों को दाना, पानी एवं गर्मी के पास बने रहने हेतु किया जाता है। ब्रूडर गार्ड सर्दी के समय ठोस-धातु या गर्मी के समय तार की जाली का बना होना चाहिए। ब्रूडर गार्ड की ऊँचाई 40-50बउ और ब्रूडर से दूरी 75 बउ होनी चाहिए।