मछली पालन के लिए प्रमुख आहार संबंधी जानकारी

          भारतीय जलाषयों में देशी और विदेशीय, दोनों प्रकार की मछलियों का पालन किया जाता है । देशी कार्प मछलियों को मेजर कार्प कहा जाता है और इस श्रेणी की मछलियों में कतला, रोहू और म्रिगल (नैन) की गणना की जाती है । इसी प्रकार विदेशीय कार्प मछलियों में ग्रास कार्प, कामन कार्प एवं सिल्वर कार्प की गणना होती है । इन मछलियों के पालन तथा संवर्धन के लिए जैविक और रासायनिक खादों, उर्वरकों एवं पोषण आहार की आवष्यकता पड़ती है ।

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  1.  मछलियों की विभिन्न अवस्थाएं और आहार की आपूर्ति

       मत्स्य पालन के समय मछलियों की स्पान, फ्राई, फिंगरलिंग तथा शारीरिक वृद्धि की अवस्था में एवं ब्रूड फिश (परिपक्व वयस्क अवस्था) की अवस्था में पोषण-आहार की आपूर्ति करना आवश्यक होता है। मछलियों की विकासशील अवस्थाओं को ध्यान में रखकर पोषण -आहार का निर्धारण करना एवं आहार की आपूर्ति करना अत्यंत आवश्यक और अनिवार्य हो जाता है। ऐसे समय वैज्ञानिक पद्धति का पालन किया जाना चाहिये । वैज्ञानिक प्रावधानों के अनुसार यदि फ्राई, फिंगरलिंग अथवा वयस्क स्थितियों में समुचित आहार की आपूर्ति की जाये, तो उत्पादन में आशातीत अभिवृद्धि होती है ।

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2. कार्प मछलियों के लिए आहार की सम्पूर्ति

भारतीय मेजर कार्प मछलियों की विभिन्न अवस्थाओं में पोषण आहार की आपूर्ति की स्थिति इस प्रकार की जाना चाहिये । यह उनकी बढ़त में सहायक सिद्ध होता है । मेजर कार्प मछलियों में कतला, रोहू और मिग्रल (नैन) मछलियाँ सहजीवी होती हैं और इनकी भी तीन अवस्थाएं विकास अथवा वर्धन की रहती हैं । इन मछलियों की स्पान की अवस्था में विटामिन, खनिज लवण, कॉडलिवर आयल, स्टार्च आदि पोषण-आहार तरल रूप में दिया जाता है । इन पोषण तत्वों की आपूर्ति होने पर फ्राई अवस्था में विकास और वर्द्धन की गति अत्यंत तीव्र हो जाती है और वे फ्राई से फिंगरलिंग अवस्था में पहुँच जाती हैं । फिंगरलिंग अवस्था में मेजर कार्प मछलियों को सोयाबीन मील, मूँगफली की खली, ऐजोला चूर्ण, खनिज लवण का मिश्रण, चावल की भूसी आदि आहार के रूप में दिया जाता है । 

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3. पोषण आहार का स्वरूप

विदेशीय मछलियों में सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प एवं कामन कार्प मछलियों की गणना की जाती है । ये मछलियाँ, भारतीय मेजर कार्प मछलियों के साथ सहजीवी होती हैं । एक जलाशय अथवा तालाब में कतला, रोहू और म्रिगल के साथ इन विदेशीय मछलियों का सहपालन किया जा सकता है । इन मछलियों की भी फ्राई, फिंगरलिंग एवं वयस्क अवस्थाएँ होती हैं तथा इन मछलियों को भी भारतीय कार्प मछलियों को दिये जाने वाले पोषण आहार की तरह ही आहार प्रदान किया जाता है ।

भारतीय मेजर कार्प और विदेशीय कार्प मछलियों का सह-पालन

जलाशयों में भारतीय मेजर कार्प मछलियाँ कतला, रोहू और म्रिगल तथा विदेशीय कार्प मछलियाँ सिल्वर कार्प, ग्रास कार्प एवं कामन कार्प मछलियों का सहपालन किया जाता है । ऐसे समय तालाब में संचय की जाने वाली अंगुलिकाओं (फिंगर लिंग्स) का आनुपातिक प्रतिशत इस प्रकार होना चाहिये –

तालाब में कतला अंगुलिकाओं का प्रतिशत 10 से 15 प्रतिशत, रोहू 15 से 20 प्रतिशत, म्रिगल 15 से 20 प्रतिशत, सिल्वर कार्प 20 से 30 प्रतिशत, ग्रास कार्प 10 से 15 प्रतिशत  तथा कामन कार्प मछलियों का प्रतिशत 20 से 25 प्रतिशत  होना चाहिये । इस अनुपात में यदि तालाब में भारतीय और विदेशीय मछलियों का सहपालन किया जाये तो बिना किसी प्रतिद्वंद्विता के सुगमता से मत्स्य पालन का कार्य सम्पन्न किया जा सकता है ।

मत्स्य पालन के समय भारतीय मेजर कार्प मछलियों तथा विदेशीय कार्प मछलियों की जो जीरा, पोना तथा वयस्क (परिपक्वता) की स्थिति होती है, उन तीनों अवस्थाओं में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन, खनिज लवण तथा ऊर्जा उत्पन्न करने वाले पोषक तत्वों की आपूर्ति की आवश्यकता होती है और इन पोषक-तत्वों की आपूर्ति होने पर मछलियों का उचित संवर्धन, विकास एवं उत्पादन होता है और आर्थिक दृष्टि से यह लाभप्रद होता है ।