मत्स्य पालन में बीमारियों की रोकथाम


रोग निवारण या रोकथामः
स्वास्थ ब̧बध मछली पालन ब̧णाली का एक महत्वपणर््ू ा पहलू है। मछली पालन में सवाधत मछलियों के स्वास्थ रक्षा और पोखर में रोगों का रोकथाम बहुत आवश्यक है जो उन्̀ाम किस्म की पैदावार के लिए निम्नवत किये जा सकते है।ं
1⁄411⁄2 पोखरों का विसंक्रमण रू मछली पालन हेतु तालाब का ब̧बंध 50-60 पी.पी. एम. ब्लीचिंग चूर्ण से करने पर न केवल हिंसक व अवांछित मछलियाँ खत्म होती है, बल्कि सभी रोगजनक भी मर जाते हैं और इस ब̧कार से पोखरों का विसंक्रमण हो जाता है। नर्सरी व रियरिंग पोखरों में मछली संचय के 4-5 दिन पहले 0.25 पी.पी.एम. के दर से ब्लीचिंग चूर्ण का ब̧योग करने से मछली की जीवन अवधि बढ़ जाती है।
1⁄421⁄2ब̧युं̈संसाधनोंकाविसक्रंमण-जाल,हापातथापोखरोंमेंब̧योगकियेजाने वालेअन्यवस्तुओंकासमय-समयपरविसक्रंमणकरनाजरूरीहोताहै।रोग सेब̧भावितपोखरोंमेंइनसामानोंकोब̧योगकरनेकेबादयदिअन्यपाख्ेारोंमें ब̧योग किया जाता है तो वे पोखरे भी संक्रमित हो जाते हैं। इसलिए आवश्यक है कि इन्हें दोबारा उपयोग में लाने से पहले अच्छी तरह से धो लें या धूप में सुखालें या किसी रसायन जैसे पोटास या फार्मलीन से विसंक्रमण कर ल।ें
1⁄431⁄2 उचित आहार रू मछलियों के अच्छे उत्पादन के लिए जरूरी है कि उन्हें उन्̀ामश्रेणीकाआहारसहीमात्रामेंदियाजाए।भाजेनकीकमीसेमछलीमें अपणर््ूाताआजातीहैतथादबावमेंआजानेसेउनकेरोगग्रस्तहोनेकीसंभावना भी बढ़ जाती है।
1⁄441⁄2 आयु के अनुसार मछलियों का रख-रखावः वयस्क मछलियाँ सामान्यतः रोगजनकों के लिए साधक का काम करती हैं। रोगजनकों से संक्रमित होने के
बावजूदयेकिसीब̧कारकाअसामान्यव्यवहारब̧दर्शितनहींकरतीक्याेिंकये शरीरिक रूप से मजबतू व ब̧तिरक्षित होती हैं। इन्हें शिशु मछलियों के साथ रखने पर शिशु मछलियाँ तुरंत संक्रमित हो जाती हैं। अतः रोग के फैलाव को रोकने के लिए अलग-अलग आय के मछलियों को अलग-अलग रखा जाना चाहिए।
1⁄451⁄2 बीमार व मृत मछली का बहिष्कार: रोगजनक अपनी विषां̈ता परपोषी द्वारा फैलातें हैं, इसलिए रोगी मछली या मृत मछली का पता चलते ही तुरंत पाख्ेारोंसेहटानाचाहिए।इनबहिष्कृतमछलियोंकोतालाबसेदूरजमीनमें ब्लीचींग पाउडर डालकर दबा देना चाहिए।
1⁄461⁄2 ब̧ाथमिक उपचार: यह उपचार मछली को सभी संभावित रोगों से बचाता है तथा मछली की रोगजनक के ब̧तिरक्षक शंि̈ भी बढ़ता है। ब̧ाथमिक उपचार केलिएपोटेिशयमपरमैंगनेटकाघाले यासामानयनमकघाले काउपयोगकिया जाता है। शिशु मछलियों को संवर्धित करने से पहले 2-3रू नमक घाले में 1-2 मिनट के लिए या 100-250 पी.पी.एम. पाटे ेशियम परर्मेगनेट के घोल में 2-3 मिनटकेलिएरखनाचाहिए।2-3पी.पी.एम.पाटेाशियमपरमैंगनेटपाख्ेारोंमें डालने से वह जल में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाता है व रोगनिरोधक का कार्य भी करता है।
ऑक्सीटेटंासाइक्लिनजैसेएन्ेटीबायोटिकआहारकेसाथ50-60मिग्रा. /किग्रा. शरीर के भार की दर से ब̧ति दिन 10-15 दिन तक देना चाहिए। यह सूक्ष्म जीवाणु से हाने े वाले रोगों में बचने का ब̧ाथमिक उपचार है।