मुर्गी पालन में सफलए एक आदिवासी महिला की कहानी

श्रीमती निरासिया देवी ३२ वर्ष गोंड आदिवासीए गुलाब स्वयं सहायता समूहएतमसारएकुसमी ब्लाकए जिला सीधीए मध्य प्रदेश की सदस्य है । उनका घर आदिवासी बहुल क्षेत्र गाँव तमसारए जिला सीधी में है । मुर्गी पालन में उसकी रूचि को देखते हुए आईण् सीण् एण् आरण् द्वारा संचालित जनजातीय उप परियोजना के अंतर्गतए पशु शिक्षा विस्तार विभागए पशुचिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालयए रीवा द्वारा श्रीमती निरसिया देवी को ६० दिन के १२० मुर्गियों ;८० रोड आई लैंड एवं ४० वाइट लेग हॉर्नद्ध का वितरण किया गयाए २ क्विंटल मुर्गियों का दानाए एक फीडर और एक प्यायु शुरुआत में दिया गया । नियमित रूप से निरसिया देवी ने स्वयं अपनी देखरेख में प्रदाय किये गए मुर्गियों को बाहर चारा चराने एवं नजदीक के पानी के श्रोत के पास पानी पिलाने ले जाती थी । साथ ही घर पर रसोई का बचा हुआ अन्नए चोकर एवं परियोजना के द्वारा दिया हुआ दाना इत्यादि भी खाने के लिए देती थी । परिणामस्वरुपए चूजों के शरीर का विकास बहुत तेजी से हुआ और १४० से १५० दिनों के अन्दर मुर्गियों ने अंडे देना शुरू कर दिए । कुछ ही महीनों में निरसिया देवी ने अंडे आसपास के गाँव में बेंचना शुरू कर दिए । औसतन उसे प्रतिदिन 4.५ अंडे प्राप्त होने लगे तथा वह इन अण्डों को ५ से ६ रूपए की दर से आसपास के गाँव में बेंचने लगी । एक साल के भीतर निरसिया देवी अपने परिवार में अंडे एवं मुर्गियों की पर्याप्त खपत के अलावा जीवित मुर्गियों एवं अण्डों की बिक्री से २०००० रुपये कमाने में सक्षम हो गई । अर्जित राशि से इन्होने अपने परिवार एवं अपने लिए नए कपडे और अन्य सामान ख़रीदे तथा मुर्गियों का अगला बैच ख़रीदा । इस तरह से श्रीमती निरसिया देवी ने गाँव के अन्य व्यक्तियों के सामने एक उदाहरण रखा कि वे बहुत हद तक स्व.समर्थित हो सकते हैं ।