रासायनिक कीटनाशक बनाम जैविक कीटनाशक

कीटनाशक अर्थात कीड़ों को मारने के लिए उपयोग में लाया जाने वाला रसायन ।

कीटनाशक, रासायनिक या जैविक पदार्थों का ऐसा मिश्रण होता है जो कीड़े मकोड़ों से होनेवाले दुष्प्रभावों को कम करने, उन्हें मारने या उनसे बचाने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग कृषि के क्षेत्र में पेड़ पौधों को बचाने के लिए बहुतायत से किया जाता है। इन कीटों से निपटने के लिए ज़्यादातर किसान रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन जिस तरह से दुनियाभर में केमिकल और पेस्टीसाइड का अंधाधुध प्रयोग हुआ है, उससे खेती, इंसान और जानवरों  को बहुत नुकसान पहुंचाया है। कीटनाशक के ज्यादा इस्तेमाल से भूमि की उर्वरा शक्ति कम हो रही है तथा यह कीटनाशक जमीन में रिसकर भूजल को जहरीला बना रहा है। नदियों तालाबों तथा अन्य जलस्रोतों में बहकर वहां के पानी को जहरीला बनाता है जिससे इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षियों और पर्यावरण को खासा नुकसान पहुंच रहा है।  रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल वाली फसलों के खाने से न सिर्फ इंसान की सेहत पर प्रभाव पड़ा, बल्कि पशु-पक्षी, कीट-पतंगे और पर्यावरण भी प्रभावित हुआ।

जैविक कीटनाशक:

जैविक एजेन्ट तथा जैविक पेस्टीसाइड जीवों यथा कीटों, फफूदों, जीवाणुओं एवं वनस्पतियों पर आधारित उत्पाद हैं, जो फसलों, सब्जियों एवं फलों को कीटों एवं व्याधियों से सुरक्षित कर उत्पादन बढ़ाने में सहयोग करते हैं। ये जैविक एजेण्ट/जैविक कीटनाशक 20-30 दिनों के अंदर भूमि एवं जल से मिलकर जैविक क्रिया का अंग बन जाते है तथा स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को कोई भी हानि नहीं पहुंचाते हैं। 

जैविक कीटनाशकों से लाभ:

  1. जीवों एवं वनस्पतियों पर आधारित उत्पाद होने के कारण, जैविक कीटनाशक लगभग एक माह में भूमि में मिलकर अपघटित हो जाते है तथा इनका कोई अंश अवशेष नहीं रहता। यही कारण है कि इन्हें पारिस्थितकीय मित्र के रूप में जाना जाता है। 
  2. जैविक कीटनाशकों के प्रयोग से कीटों/व्याधियों में सहनशीलता एवं प्रतिरोध नहीं उत्पन्न होता जबकि अनेक रासायनिक कीटनाशकों के प्रयोग से कीटों में प्रतिरोध क्षमता उत्पन्न होती जा रही है, जिनके कारण उनका प्रयोग अनुपयोगी होता जा रहा है।
  3. जैविक कीटनाशकों के प्रयोग के तुरन्त बाद फलियों, फलों, सब्जियों की कटाई कर प्रयोग में लाया जा सकता है, जबकि रासायनिक कीटनाशकों के अवशिष्ट प्रभाव को कम करने के लिए कुछ दिनों की प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
  4. जैविक कीटनाशकों के सुरक्षित, हानिरहित तथा पारिस्थितकीय मित्र होने के कारण विश्व में इनके प्रयोग से उत्पादित चाय, कपास, फल, सब्जियों, तम्बाकू तथा खाद्यान्नों, दलहन एवं तिलहन की मांग एवं मूल्यों में वृद्धि हो रही है, जिसका परिणाम यह है कि कृषकों को उनके उत्पादों का अधिक मूल्य मिल रहा है।  

उदाहरण स्वरुप नीम  के पत्ते, सिताफल के पत्तें/बीज, लहसुन गुदा इत्यादि का उपयोग जैविक कीटनाशक के रुप में किया जा सकता है।