थनैला रोग के नियंत्रण की योजना


यह सर्वप्रथम समझ लेना चाहिये की मंहगी से मंहगी एंटीबायोटिक का उपयोग करके भी थनैला रोग से छुटकारा नहीं पाया जा सकता है । दुधारु पशु में थनैला रोग का उन्मूलन संभव नहीं है सिर्फ एक प्रभावी थनैला रोग के नियंत्रण की योजना से ही इस रोग की व्यापकता को कम किया जा सकता है।
एक प्रभावी थनैला रोग के नियंत्रण योजना के पाँच प्रमुख बिन्दु होते है –
1- ग्वाले का साफ रहना विशेषकर उसका हाथ।
2- थनों को सूखा और साफ रखना (24 घण्टंे × 7 दिन)
3- सभी थनैला रोग ग्रसित दुधारु पशुओं को पहचानना एवं तुरंत इलाज करवाना।
4- दुधारु पशुओं का शुष्क अवस्था ;क्तल बवू जीमतंचलद्ध में इलाज।
5- ऐसे दुधारु पशुओं को हटायें जिनका थनैला रोग ला-इलाज हो गया है।

ग्वाले का साफ रहना विशेषकर उसका हाथ।


थनैला रोग मुख्य रुप से दो प्रकार से फैलते है – थन से थन या वातावरण से थन में। चूकिं ग्वाला हर दुधारु पशुओं को छूता है इस कारण ग्वाले का साफ रहना विशेषकर उसका हाथ का अत्यंत आवश्यक है। उसे हर पशु से दूध दुहने के बाद पोटाश पानी से हाथ धोना चाहिये ताकि थनैला रोग एक पशु से दुसरे पशु में न फैल सके।